‘सर्वश्रेष्‍ठ‘ का विशिष्‍ट विवाह, दुनिया की सबसे बड़ी वेडिंग सेरेमनी

0 417

उसका न आदि है और न अंत, वह व्‍यक्‍त भी है और अव्‍यक्‍त भी, वह दृश्‍य है और अदृश्‍य भी है। तभी तो वह विशिष्‍ट है और सभी में श्रेष्‍ठ। उसकी हर बात निराली है। सर्वश्रेष्‍ठ के इसी निरालेपन को वरिष्‍ठ पत्रकार, लेखक व टीवी 9 भारतवर्ष के न्‍यूज डायरेक्‍टर हेमंत शर्मा ने दुनिया की सबसे बड़ी वेडिंग सेरेमनी के परिप्रेक्ष्‍य में बखानने का जतन किया है। ‘सर्वश्रेष्‍ठ‘ के विशिष्‍ट विवाह पर्व की शब्‍द व्‍यंजना का आप भी आनंद लें। ठीक वैसा ही जैसा उन्‍होंने अपने फेसबुक वाल पर व्‍यक्‍त किया है।

दुनिया की सबसे बड़ी ‘वेडिंग सेरिमनी।’ सबसे लम्बा चलना वाला वैवाहिक कार्यक्रम ,सबसे ज़्यादा शामिल होने वाले लोग , सबसे ज़्यादा जगहों पर होने वाला रिसेप्शन।बिना किसी इंवेट मैनेजमेंट कम्पनी के यही महाशिवरात्रि की ताक़त है। महाशिवरात्रि यानी भोलेशंकर का पार्वती से विवाहोत्सव। बराती में भी समतामूलक समाज का प्रतिनिधित्व। भूत, पिशाच, पागल,भिखारी, नशेडी, शराबी ,कबाबी सब। अकेला त्यौहार जो कश्मीर में ‘हेराथ’ से लेकर रामेश्वरम् तक एक साथ मनाया जाता है।माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ भी इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ।

mahashivratri

मैं बरसों तक बनारस में निकलने वाली शिव बारात का बराती रहा हूं। जीवन भी शिव बारात जैसा ही चल रहा है।रक़म रक़म के लोग है। कभी कभी लगता है पूरा जीवन ही शिव बारात है। बचपन में पूरा घर शिवरात्रि के उपवास पर रहता था। हम बच्चे थे उपवास कैसे हो? पर हम उपवास की ज़िद करते थे। तभी मॉं ने जुगत निकाली तुम बाराती हो।शिव के बाराती सब खा पी सकते है। इसलिए हम बचपन से शिव के बाराती है।

अवढरदानी, भूतभावन,गंगाधर , शशिधर, विरूपाक्ष, अकेले ऐसे देवता है जो पूरे देश के हर कोने में पूजे जाते हैं और सभी उनके विवाह का ये उत्सव मानते हैं। भगवान् शिव और पार्वती के विवाह का ये उत्सव बसंत पंचमी के दिन से शुरू हो जाता है , उस दिन बाबा का तिलकोत्सव होता है , उसके बाद शिवरात्रि के दिन विवाह होता है जिसकी बरात की शोभा भी उनके भक्त गण अतुलनीय बना देते हैं। विवाह के बाद माँ पार्वती रस्म के हिसाब से अपने मायके चली जाती है। और जब बाबा उनका गौना कराकर उन्हें कैलाश लाते है तो वो दिन रंगभरी एकादशी का होता है और उसी रोज़ से बाबा विश्वनाथ अपने भक्तो से जमकर होली खेलते है इसलिए वैसे रंगभरी एकादशी कहते है।

mahashivratri

कभी कभी लगता है। आखिर शिव में ऐसा क्या है? जो उत्तर में कैलास से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम् तक वे एक जैसे पूजे जाते हैं। उनके व्यक्तित्व में कौन सा चुंबक है जिस कारण समाज के भद्रलोक से लेकर शोषित, वंचित, भिखारी तक उन्हें अपना मानते हैं। वे क्यों सर्वहारा के देवता हैं। उनका दायरा इतना व्यापक क्यों है?

राम का व्यक्तित्व मर्यादित है। कृष्ण का उन्मुक्त और शिव असीमित व्यक्तित्व के स्वामी। वे आदि हैं और अंत भी। शायद इसीलिए बाकी सब देव हैं। केवल शिव महादेव। वे उत्सव प्रिय हैं। शोक, अवसाद और अभाव में भी उत्सव मनाने की उनके पास कला है। वे उस समाज में भरोसा करते हैं। जो नाच-गा सकता हो। यह शैव परंपरा है। जर्मन दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे कहते हैं ‘उदास परंपरा बीमार समाज बनाती है।’ शिव का नृत्य श्मशान में भी होता है। श्मशान में उत्सव मनानेवाले वे अकेले देवता है। लोक गायन में भी वे उत्सव मनाते दिखते हैं। ‘खेले मसाने में होरी दिगंबर खेले मसाने में होरी। भूत, पिशाच, बटोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी।’

mahashivratri

सिर्फ देश में ही नहीं विदेश में भी शिव की गहरी आस्था है। हिप्पी संस्कृति साठवें दशक में अमेरिका से भारत आई। हिप्पी आंदोलन की नींव यूनानियों की प्रति संस्कृति आंदोलन में देखी जा सकती है। पर हिप्पियों के आदि देवता शिव तो हमारे यहाँ पहले से ही मौजूद थे या यों कहे शिव आदि हिप्पी थे। अधनंगे, मतवाले, नाचते-गाते, नशा करते भगवान् शंकर। इन्हें भंगड़, भिक्षुक, भोला भंडारी भी कहते हैं। आम आदमी के देवता भूखो-नंगों के प्रतीक। वे हर वक्त समाज की सामाजिक बंदिशों से आजाद होने, खुद की राह बनाने और जीवन के नए अर्थ खोजने की चाह में रहते॒हैं।

यही मस्तमौला ‘हिप्पीपन’ उनके विवाह में अड़चन था। कोई भी पिता किसी भूखे, नंगे, मतवाले से बेटी ब्याहने की इजाजत कैसे देगा। शिव की बारात में नंग-धड़ंग, चीखते, चिल्लाते, पागल, भूत-प्रेत, मतवाले सब थे। लोग बारात देख भागने लगे। शिव की बारात ही लोक में उनकी व्याप्ति की मिसाल है।

mahashivratri

विपरीत ध्रुवों और विषम परिस्थितियों से अद्भुत सामंजस्य बिठानेवाला उनसे बड़ा कोई दूसरा भगवान् नहीं है। मसलन, वे अर्धनारीश्वर होकर भी काम पर विजेता हैं। गृहस्थ होकर भी परम विरक्त हैं। नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं। उग्र होते हैं तो तांडव, नहीं तो सौम्यता से भरे भोला भंडारी। परम क्रोधी पर दयासिंधु भी शिव ही हैं। विषधर नाग और शीतल चंद्रमा दोनों उनके आभूषण हैं। उनके पास चंद्रमा का अमृत है और सागर का विष भी। सांप, सिंह, मोर, बैल, सब आपस का बैर-भाव भुला समभाव से उनके सामने है। वे समाजवादी व्यवस्था के पोषक। वे सिर्फ संहारक नहीं कल…

कोई उपेक्षितों को गले नहीं लगाता, महादेव ने उन्हें गले लगाया। श्मशान, मरघट में कोई नहीं रुकता। शिव ने वहां अपना ठिकाना बनाया। जिस कैलास पर ठहरना कठिन है। जहां कोई वनस्पति नहीं, प्राणवायु नहीं, वहां उन्होंने धूनी लगाई। दूसरे सारे भगवान् अपने शरीर के जतन के लिए न जाने क्या-क्या द्रव्य लगाते हैं। शिव केवल भभूत का इस्तेमाल करते है। उनमें रत्ती भर लोक दिखावा नहीं है। शिव उसी रूप में विवाह के लिए जाते हैं, जिसमें वे हमेशा रहते हैं। वे साकार हैं, निराकार भी। इस इससे अलग लोहिया उन्हे गंगा की धारा के लिए रास्ता बनानेवाला अद्धितीय इंजीनियर मानते थे।

mahashivratri

शिव न्यायप्रिय हैं। मर्यादा तोड़ने पर बेकाबू हुआ तो उन्होने उसे भस्म किया। अगर किसी ने अति की तो उनके पास तीसरी आंख भी है। दरअसल तीसरी आंख सिर्फ ‘मिथ’ नहीं है। आधुनिक शरीर शास्त्र भी मानता है कि हमारी आंख की दोनों भृकुटियों के बीच एक ग्रंथि है और वह शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा है, रहस्यपूर्ण भी। इसे ‘पीनियल ग्रंथि’ कहते हैं। यह हमेशा सक्रिय नहीं रहती पर इसमें संवेदना ग्रहण करने की अद्भुत ताकत है। इसे ही शिव का तीसरा नेत्र कहते हैं। उसके खुलने से प्रलय होगा। ऐसी अनंत काल से मान्यता है।

शिव का व्यक्तित्व विशाल है। वे काल से परे महाकाल है। सर्वव्यापी हैं, सर्वग्राही हैं। सिर्फ भक्तों के नहीं देवताओं के भी संकटमोचक हैं। उनके ‘ट्रबल शूटर’ हैं। शिव का पक्ष सत्य का पक्ष है। उनके निर्णय लोकमंगल के हित में होते हैं। जीवन के परम रहस्य को जानने के लिए शिव के इन रूपों को समझना जरूरी होगा, क्योंकि शिव उस आम आदमी की पहुंच में हैं, जिसके पास मात्र एक लोटा जल है। इसीलिए उत्तर में कैलास से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम् तक उनकी व्याप्ति और श्रद्धा एक सी है।

हर हर महादेव।

लेखक टीवी 9 भारतवर्ष न्यूज चैनल के संस्थापक और न्‍यूज डायरेक्‍टर की जिम्‍मेदारी निभा रहे हैं। लेखक देश के जाने-माने पत्रकार हैं।

हेमंत शर्मा वरिष्ठ पत्रकार

यह भी पढ़ें: महाशिवरात्रि : काशी की सड़कों पर उतरा आस्था का जनसैलाब, शिवालयों में बोल बम की गूंज

यह भी पढ़ें: महाशिवरात्रि पर शिवालयों में लगी श्रद्धालुओं की कतार

-Adv-

(अन्य खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं। अगर आप डेलीहंट या शेयरचैट इस्तेमाल करते हैं तो हमसे जुड़ें।)

Comments

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More