yogi adityanath

…तो क्या मुख्यमंत्री योगी भी हैं गुटबाजी का शिकार ?

Martand Singh

योगी आदित्यनाथ, ये नाम जेहन में आते ही उभरती है एक ऐसे शख्स की तस्वीर जो  सन्यासी होते हुए भी लोगों से जुड़ा है, वो प्रशासक है तो दूसरी तरफ लोगों के लिए पूज्य है। अपने लोगों के लिए स्वयं में पूरा धर्म है, उसकी एक आवाज पर लाखों नवजवान सडकों पर उतर आते हैं। एक तेजतर्रार युवा जब संसद में बोलता है तो बड़े बड़ों की बोलती बंद कर देता है। एक ऐसा नेता जो हमेशा विपक्ष को खुली चुनौती देता है। एक ऐसा शख्स जिसकी अपनी एक अलग सत्ता है। पर, आज कल योगी खुल कर बोल भी नहीं पा रहे हैं।

हनक चलती थी योगी की

कहा जाता है कि जब योगी गोरखपुर के सांसद हुआ करते थे, तब केंद्र या प्रदेश में सरकार जिसकी भी हो गोरखपुर में चलती सिर्फ योगी की थी।

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वही योगी अब सूबे के मुख्यमंत्री है। पर, कई लोगों को अब योगी आदित्यनाथ में वो तेजी नहीं दिखती। लोगों को अब योगी  विपक्ष के हमलों से ज्यादा अपनों यानी अपने पार्टी के लोगों की घेराबंदी से परेशान दिखने लगे हैं।

एक साल में आयी गिरावट

प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने अभी एक साल ही हुआ है। पर, अभी से ही योगी के खिलाफ उन्हीं के पार्टी के नेताओं ने अनदेखी का आरोप लगते हुए मोर्चा खोल दिया है।

चाहे सांसद सावित्री बाई फुले हो या रॉबर्ट्सगंज  के सांसद  छोटे लाल खरवार, दोनों नेताओ ने योगी आदित्यनाथ पर दलितों की अनदेखी का आरोप लगते हुए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से शिकायत करते हुए हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है।

योगी अब लोगों को डांट कर भगाने लगे हैं

सांसद छोटेलाल खरवार ने तो योगी जी पर मदद करने की बजाय डांट कर भगाने तक की बात कह डाली। सहयोगी पार्टी के नेता भी योगी पर अनदेखी का आरोप लगा चुके हैं और इसकी शिकायत प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष से कर चुके हैं। कुछ तो वजह जरूर है जो इस समय योगी पर उन्हीं की पार्टी में चौतरफा हमले हो रहे हैं।

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योगी के यहां किसी की सुनवाई नहीं

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और राज्य में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का कहना है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के यहां किसी की सुनवाई नहीं है।

2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बीएसपी से बीजेपी में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी अभी हाल ही में कहा था कि योगी राज से बेहतर शासन मायावती के राज में था। बहन जी अफसरों को नियंत्रण में रखती थीं, लेकिन योगी के राज में अफसर बेलगाम हो गए हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये हमले सरकार पर न होकर सीधे योगी आदित्यनाथ पर हो रहे हैं।

योगी सरकार में कई पावर सेंटर

इसकी वजह  अंदर बने अलग अलग पावर सेंटर्स है, जो गाहे बगाहे वर्चस्व की लड़ाई लड़ते रहते हैं। गौर से देखें तो योगी विरोध के केंद्र में सरकार और संगठन के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई है। नेताओं के अहंकार का टकराव है, नेताओं की आहत भावनाएं हैं।

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जानकारों की मानें तो पार्टी के अंदर संगठन और सरकार में कई अलग-अलग गुट हैं, जिनके बीच वर्चस्व की जंग चल रही है। चू‍कि योगी इस समय मुख्यमंत्री हैं लिहाजा इस समय सबके निशाने पर वर्तमान में वो ही हैं।

सुनील बंसल सबसे शक्तिशाली

अगर पार्टी में गुटबंदी की बात करें तो सबसे पहले और सबसे मजबूत गुट मान जाता है सुनील बंसल का। सुनील बंसल संगठन मंत्री, और प्रदेश भाजपा के केंद्र द्वारा नियुक्त केयर टेकर भी हैं। इन्हें राजनीतिक हलकों में सुपर सीएम कहा जाता है। वजह साफ़ है सुनील बंसल सीधे अमित शाह को रिपोर्ट करते हैं।

अधिकांश अंदरुनी फैसले बंसल लेते हैं

माना जाता है कि सरकार के ज्यादातर अंदरूनी फैसले सुनील बंसल  ही लेते हैं। दूसरा बड़ा गुट हैं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का। केशव प्रसाद मौर्या और योगी की अदावत किसी से छुपी नहीं है।

चाहे सीएम दफ्तर से नेम प्लेट हटाने का मामला हो या प्रोग्राम मंच साझा न करने का मामला, मीडिया में ऐसी खबरे अक्सर आती रहीं हैं। 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को भारी बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री की दौड़ में कई नेता शामिल थे। जिनमें खुद केशव मौर्या के साथ साथ मनोज सिन्हा का नाम था।

योगी को मुख्‍यमंत्री तो बनाया पर पूरी छूट नहीं

तब नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने सबको किनारे करते हुए भगवाधारी योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi) को मुख्यमंत्री तो बनाया, पर पूरी छूट नहीं दी। कई पॉवर सेंटर बना दिए और इसी वजह से केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया।

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जब कोई शख्स मजबूर हो तो उस पर कोई भी हमलावर हो  सकता है। इस समय  उत्तर प्रदेश में यही देखने को मिल रहा है। योगी पर हमला करने वाले ज्यादातर नेताओं की हैसियत इतनी बड़ी नहीं है कि वो बिना किसी संरक्षण के उन पर हमला कर सकें। यह संरक्षण उन्हें सीधे तौर पर किसी न किसी पॉवर सेंटर से मिल रहा है। और, उस पॉवर सेंटर को बनाने वाले कोई और नहीं बल्कि खुद मोदी और शाह हैं।

योगी पर हमले के लिए कौन जिम्‍मेदार

इस लिहाज से योगी आदित्यनाथ पर हो रहे हमलों के लिए भी बहुत हद तक वही दोनों जिम्मेदार हैं। खैर वजह चाहे कोई भी पर इतना तो तय है कि प्रदेश में विपक्ष का काम खुद भारतीय जनता पार्टी के लोग  कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अस्थिर करने का काम उनके ही सहयोगी कर रहे हैं।

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