शोर-गुल से अलग है ‘रवीश कुमार’ की पत्रकारिता

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पत्रकारिता अपने आप में एक जटिल पेशा है। अगर बात टीवी पत्रकारिता की हो तो 24 घंटे समाचार दिखाने की होड़ में खबरों का संसार ही पूरी तरह बदल गया है।

एक ओर जहां टीवी पर खबरों के साथ-साथ शोर भी सुनाई देता है वही रवीश कुमार की पत्रकारिता का अंदाज थोड़ा अलग है।

अलग है इनका अंदाज-

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‘एनडीटीवी इंडिया’ में संपादक रवीश कुमार अपनी बोलने के अंदाज के लिए पसंद किए जाते है। मुस्कुराते हुए तंज मारना इनकी खासियत में शुमार है।

एनडीटीवी एडिटर रवीश कुमार सरकार की खामियां गिनाते है। शायद यही कारण है कि सरकार इनका विरोध करती है। वो बड़े नेताओ को डिबेट के लिए बुलाते है पर सरकार का कोई भी व्यक्ति आने को राजी नहीं है।

ज़मीने मुद्दे उठाते हैं रवीश-

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रवीश कुमार भारतीय मीडिया के बेहतर पत्रकारों में से एक हैं। हर एक मुद्दे पर वह प्रखरता से पत्रकारिता करते हैं।

वह हर उस मुद्दे को उठाते है जिस पर सरकार को ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता होती है, चाहे फिर वह किसानों का मुद्दा हो, युवाओं का मुद्दा हो या महिलाओं का।

रवीश कुमार से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां-

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जीवन परिचय

वास्तविक नाम— रविश कुमार पांडेय
व्यवसाय— भारतीय टीवी ऐंकर
जन्मतिथि— 5 दिसंबर 1974
जन्मस्थान— मोतीहारी, बिहार, भारत
गृहनगर— मोतीहारी, बिहार, भारत
स्कूल/विद्यालय— लॉयला हाई स्कूल, पटना, भारत
महाविद्यालय/विश्वविद्यालय— देशबंधु कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली, भारत
शैक्षिक योग्यता— पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

पुरस्कार—

गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार (2010, सम्मानित 2014),
पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए रामनाथ गोयनका पुरस्कार,
वर्ष का सर्वश्रेष्ठ पत्रकार (प्रसारण) 2013,
रेमन मैगसेसे पुरस्कार (2019) छत्तीसगढ़ सरकार माधव राव सप्रे सम्मान 2019

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-Adv-

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