पर्यावरण दिवस विशेष : प्रकृति से प्रेम और सम्मान जरुरी

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जल पुरुष के नाम से मशहूर पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह का मानना है कि आज प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उसके प्रति प्यार, स्नेह और सम्मान जताने की जरूरत है। राजेंद्र ने यह बात ऐसे समय में की है, जब दुनिया आगामी पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की तैयारी में है।

मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र ने कहा, “भारत के लोग अपने पर्यावरण और धरती को सम्मान देते थे। सुबह उठकर मातृभूमि को प्रणाम करना हमारे व्यवहार और संस्कार का हिस्सा था। जीवन में हमेशा भाव रहता था कि हमें ईश्वर ने बनाया है और इसलिए हम इस प्रकृति को बिगाड़ेंगे तो हम भी बिगड़ जाएंगे”

राजेंद्र ने इस सोच में आई गिरावट के लिए आधुनिक शिक्षा को जिम्मेदार ठहराया और कहा, “जब से हमारी यह सोच खत्म हुई है, तब से पर्यावरण के प्रति आस्था रखने वाला और पर्यावरण रक्षा में सबसे आगे रहने वाला भारतीय आधुनिक शिक्षा के कारण अब इसमें बहुत पीछे चला गया है। हमारा मूल भारतीय ज्ञान जहन से मिट गया है। हमें फिर से पानी और प्रकृति को समझना होगा, पर्यावरण तभी बचेगा।”

पर्यावरण दिवस के महत्व के सवाल पर राजेंद्र ने कहा, “पर्यावरण दिवस मनाने से पर्यावरण नहीं बचने वाला। यह इसलिए मनाया जाता है, ताकि लोगों को अपने जीवन में पर्यावरण का महत्व समझने का मौका मिले। लेकिन आजकल पर्यावरण दिवस केवल कार्यक्रम बनकर रह गया है। जबकि पर्यावरण का काम इसे व्यवहार और संस्कार में लाने से होगा।”

‘स्टॉक होम जल पुरस्कार’ विजेता राजेंद्र ने देश और दुनिया के पर्यावरण के बारे में कहा, “इस समय पूरी दुनिया में पर्यावरण का संकट भायवह है। इस आपदा से निपटना है तो जिस तरह राजस्थान के लोगों ने अपना पानी, अपनी मिट्टी, अपना जंगल सब बचाया, उसी तरह दुनिया में भी प्राकृतिक संसाधनों को बचाना और उसे संरिक्षत करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “आज वातावरण में गरम गैसें बढ़ रही हैं और पानी और ऑक्सीजन की उपलब्धता घट रही है। यदि ऐसा ही रहा तो 21वीं सदी में ही हम पर्यावरण के विनाश का दृश्य देखेंगे और यह भयानक स्थिति होगी।” उन्होंने कहा, “यह पानी और मिट्टी, जंगल के लिए भी खराब है। यदि इन गैसों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो स्थिति भयावह होगी।”

आखिर इस पर नियंत्रण के उपाय क्या हैं? राजेंद्र ने आगे कहा, “इसके लिए वैश्विक स्तर पर हमें ऐसी नीति और कानून बनाने होंगे, जो प्रकृति को सम्मान देने वाला हो। प्रकृति का संरक्षण करने वाले की सुरक्षा की जानी चाहिए और हानि पहुंचाने वाले को सजा होनी चाहिए। वैश्विक नीतियों में यह स्पष्ट होना चाहिए।”

राजेंद्र ने इस संदर्भ में सरकारों को आगाह करते हुए कहा, “21वीं सदी में पर्यावरण, पारिस्थितिकी से संबंधित आपदाएं बढ़ रही हैं। हमारी सरकारों को इस संदर्भ में अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और हमारे समुदाय को भी इसका एहसास होना चाहिए। जबतक सरकार और समाज का हर तबका अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, हमारा पर्यावरण नहीं बचने वाला है।”

आखिर पर्यावरण को लेकर सरकारी पहल कितनी कारगर है? राजेंद्र ने कहा, “पर्यावरण की सरकारी पहल एक फैशन की तरह बिकती है। यह समारोहों के रूप में दिखाई देती है। इसलिए इससे कुछ कारगर होगा, ऐसा नहीं दिखता। यह केवल दिखावटी कार्यक्रम की तरह है।”

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राजेंद्र ने हाल ही में बाढ़-सुखाड़ मुक्त भारत के लिए एक अभियान शुरू किया है। उन्होंने इस बारे में कहा, “देश में पिछले तीन वर्षो से सूखे की स्थिति बनी हुई है। इससे मुक्ति के लिए हमने राष्ट्रीय स्तर पर एक सुखाड़मुक्त जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया है। यह 15 मई को शुरू हुआ था, जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक और गोवा से गुवाहटी तक जाएगा।”

राजेंद्र ने पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी गिनाए। उन्होंने कहा, “मिट्टी का कटाव न हो, पानी के साथ मिट्टी बहकर नदियों का तल ऊपर न उठाए। देश में मिट्टी का कटाव रोकने की कोशिश की जाए और वर्षा जल को समुद्र में जाने से रोककर उसे धरती के पेट में डाला जाए।

यह केंद्र और राज्यों और पंचायतों की जिम्मेदारी है, इसमें समाज को भी जोड़ें।” उन्होंने अंत में कहा, “हमें अपनी जीवनशैली भी बदलनी होगी। एसी, वाहनों के पट्रोल से कार्बन का स्तर बढ़ रहा है। इन सब पर हम स्वयं नियंत्रण कर सकते हैं।”

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