World Photography Day 2020: जानें, कैसे बदल गई तस्वीरों की दुनिया ?

0 368

हर साल 19 अगस्त को ‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’ (World Photography Day) मनाया जाता है। इसी क्रम में आज यानी 19 अगस्त को दुनिया ‘विश्व फोटोग्राफी दिवस’ मना रही है। यह दिन उन लोगों को समर्पित होता है, जिन्होंने खास पलों को तस्वीरों में कैद कर उन्हें हमेशा के लिए यादगार बना दिया।

आपको बता दें कि ‘फोटोग्राफी’ शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के फोटोज (प्रकाश) एवं ग्राफीन (खींचने) शब्दों से मिलकर हुई है। फोटोग्राफी की वजह से संसार के दूर-दूर के हिस्से एक-दूसरे के करीब आए। फोटोग्राफी का विशेष योगदान एक-दूसरे को जानने-समझने में, संस्कृतियों के विस्तार में और इतिहास के मानसिक संरक्षण में है।

‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’ की शुरुआत

9 जनवरी, 1839 को डॉगोरोटाइप प्रक्रिया से तस्वीरें निकालना शुरू किया गया था। फ्रांस के जोसेफ नाइसफोर और लुइस डॉगेर ने इसका अविष्कार किया था। इसे फ्रांस ने 19 अगस्त 1839 को पेटेंट कराया था। उसी की याद में ‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’ मनाया जाता है। तब से हर साल 19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जा रहा है।

वर्ल्ड फोटोग्राफी डे

 

​कब से हुई ‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’ की शुरुआत

साल 2009 में ‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’ मनाने के प्लान पर काम करना शुरू हुआ, जो कि ऑस्ट्रेलिया के फोटोग्राफर कोर्स्के आरा द्वारा किया गया। 19 अगस्त 2010 को विश्व फोटोग्राफी दिवस पर पहली बार ग्लोबल ऑनलाइन गैलरी का आयोजन किया गया था। इस गैलरी में दुनियाभर के 250 से अधिक फोटोग्राफरों ने अपनी तस्वीरों को भेजा। इस गैलरी की वेबसाइट को 100 से अधिक देशों के लोगों ने देखा।

world photography day 2020 know the interesting facts of the day 8 ...

…तो इसलिए मनाते हैं विश्व फोटोग्राफी दिवस’

फोटोग्राफी के क्षेत्र में लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने, विचारों के आदान-प्रदान और लोगों को फोटोग्राफी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व फोटोग्राफी दिवस’ मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह भी है कि दुनियाभर के फोटोग्राफरों को एकजुट किया जा सके।

history of photography from black and white to colour

​तस्वीरों में मानवीय संवेदनाएं का अहम रोल

वहीं इस दिवस पर यूपी की राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ फोटो पत्रकार आशीष रमेश पांडे के मुताबिक, एक तस्वीर में जबतक मानवीय संवेदनाएं नहीं दिखेंगी, तब तक उसे बेहतर तस्वीर नहीं माना जा सकता। इन्हीं संवेदनाओं की वजह से कहा जाता है कि एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। उनका कहना है कि अच्छी तस्वीर खींचने के लिए फ्रेम में क्या लेना है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हमें क्या छोड़ना है।

यह भी पढ़ें: यह तस्वीर बनी ‘वर्ल्ड प्रेस फोटो’, फोटोग्राफर बोला – उनकी आंखों में डर देखा था

यह भी पढ़ें: कूड़ा बीनने वाला बन गया मशहूर फोटोग्राफर

यह भी पढ़ें: कोविड-19: वैक्सीन बनाने के बेहद करीब पहुंचा भारत, Covaxin का आखिरी ह्यूमन ट्रायल आज

(अन्य खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हेलो एप्पडेलीहंट या शेयरचैट इस्तेमाल करते हैं तो हमसे जुड़ें।)

Comments

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More