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पुलिसकर्मियों के सुसाइड पर क्यों मौन है विभाग ?

आखिर क्या वजह है कि हर परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किए जाने वाले अफसर और पुलिसकर्मी छोटी-मोटी बातों को लेकर आत्महत्या(policemen’s suicide) करने को मजबूर हो रहे हैं। कुछ महीनों या यूं कहें कि पिछले कुछ सालों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर क्या वजह है कि पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करने से ज्यादा आसान मौत को गले लगाना दिखाई दे रहा है?

करीब दो महीने पहले एटीएस के एएसपी रहे राजेश साहनी ने सर्विस रिवॉल्वर से अपने दफ्तर में खुद को गोली मार ली थी। वहीं 4 सितंबर को कानपुर एसपी सिटी के पद पर तैनात सुरेंद्र दास ने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की जो अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं। कहीं न कहीं ऐसा इसलिए भी हो रहा है कि अफसर नौकरी और परिवार के बीच संतुलन नहीं बैठा पा रहे हैं और सुसाइड करने को मजबूर हो जाते हैं।

आईपीएस ने खाया जहरीला पदार्थ

कानपुर में एसपी सिटी के पद पर तैनात आईपीएस सुरेन्द्र दास ने 5 सितंबर को जहरीला पदार्थ खा लिया था जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। सुरेंद्र दास को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। सुरेंद्र की शादी सर्वोदय नगर स्थित ईएसआई निदेशालय में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. राघवेंद्र सिंह की बेटी डॉ. रवीना से नौ अप्रैल 2017 को हुई थी। सुरेंद्र दास की आत्महत्या के पीछे कई वजह सामने आ रही हैं। खबरों के मुताबिक, सुरेंद्र दास की अक्सर उनकी पत्नी रवीना से नोक-झोंक होती रहती थी।

शादी के बाद से उनकी पत्नी रवीना का झुकाव अपने मायके की तरफ ज्यादा था जिसको लेकर भी विवाद होता रहता था। यही वजह थी कि सुरेंद्र भी अपने घर बहुत कम ही जाते थे। इसके साथ ही पत्नी के साथ हो रहे झगड़ों के कारण उन्होंने घर वालों से बात करना भी छोड़ दिया था और पिछले करीब 40 दिनों ने उन्होंने अपनी मां से भी बात नहीं की थी। ऐसा पुलिस की छानबीन में सामने आया है। सुरेंद्र ने आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था जिसे जहर खाने के बाद अपनी पत्नी को दिया था और कहा कि अब मैं जा रहा हूं।

सर्विस रिवॉल्वर से खुद को मारी गोली

यूपी एसटीएफ में एएसपी के पद पर तैनात राजेश साहनी ने 29 मई को अपनी सर्विस रिवाल्वर से अपने ऑफिस में ही खुद को गोली मार ली थी। पीपीएस अधिकारी राजेश साहनी गोमतीनगर में एटीएस मुख्यालय में तैनात थे।राजेश साहनी ने जिस दिन खुद को गोली मारी थी उस दिन वो छुट्टी पर थे लेकिन उसके बावजूद वो ऑफिस गए हुए थे।

राजेश साहनी सुबह एटीएस मुख्यालय,गोमतीनगर पहुंचे और गनर मनोज से अपनी पिस्टल मंगाई। पिस्टल देकर गनर जैसे ही बाहर निकला। इस बीच साहनी ने दाए ओर कनपटी पर सटा कर गोली मार ली। गोली की आवाज सुनकर बाहर खड़े कर्मचारी दौड़कर जब अंदर पहुंचे तो देखा खून से लथपथ राजेश साहनी अपनी कुर्सी पर पड़े हुए हैं। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई थी।

पूर्व डीजीपी ने बताई ये वजह…

यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि अफसरों के ऊपर लगातार काम करने का दबाव, ड्यूटी की कोई टाइमिंग नहीं, छुट्टी का न मिलना जैसे कारणों की वजह से भी कई बार ऐसा होता है कि अफसर हो चाहे सिपाही तनाव में आ जाता है और सुसाइड करने जैसा बड़ा कदम उठा लेता है। उनका कहना है कि अफसर हो या सिपाही, उनको सुविधाएं विक्टोरिया के जमाने की दे रही है सरकार और उम्मीद 21वीं सदी के जैसी लगा रखी है।

अफसरों की क्षमता से 30 गुना ज्यादा काम की उम्मीद की जाती है और करवाया भी जा रहा है। जबकि दूसरे देशों में पुलिस से उतना ही काम लिया जाता है जितनी उनकी क्षमता होती है। इसके साथ ही सिर्फ आठ घंटे की ड्यूटी कराई जाती है। लेकिन यहां पर छुट्टी मिलती नहीं है ऊपर से इतना प्रेशर डाल दिया जाता है कि अफसर उस दबाव से निकल नहीं पाता और ऐसे कदम उठा लेता है।

पूर्व डीजीपी ने दिया सुझाव

विक्रम सिंह का ये सुझाव है कि पुलिसकर्मियों को हफ्ते में एकदिन की छुट्टी निर्धारित की जाए। और विभाग की तरफ से उनकी काउंसिलिंग के लिए भी व्यवस्था की जाए जिससे हर एक महिने या 15 दिनों में उनकी काउंसिलिंग कराई जाए। उन्होंने कहा कि देश की कई पैरा मिलिट्री फोर्सेस में काउंसिलिंग की सुविधा शुरु की गई है उसी की तर्ज पर यूपी पुलिस को भी ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए।

साल 2016 में आईएएस संजीव दुबे ने लगाई थी फांसी

साल 2016 में आईएएस संजीव दुबे ने लखनऊ स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आईएएस संजीव दुबे प्रमुख सचिव होमगार्ड के पद पर तैनात थे। और पिछले कई सालों से बीमार चल रहे थे जिसकी वजह से वो काफी तनाव में रहते थे। संजीव की गिनती प्रदेश के चुनिंदा अफसरों में होती थी। साथ ही वो एक बेदाग और ईमानदार छवि के अफसर थे।

आईएएस अनुराग तिवारी की सड़क किनारे मिली थी लाश

पिछले साल 17 मई 2017 को आईएएस अनुराग तिवारी का संदिग्ध हालत में लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित मीराबाई गेस्ट हाउस के पास मिला था। अनुराग तिवारी 2007 बैच के कर्नाटक कैडर के आईएएस थे। अनुराग की मौत को लेकर उनके परिजनों ने कहा था कि वो कर्नाटक में हुए किसी बड़े घोटाले का राजफाश करने वाले थे जिसके चलते उन्हें धमकियां मिल रही थीं। अनुराग के साल साल की नौकरी में करीब आठ बार तबादला किया जा चुका था।

इंस्पेक्टर ने दिया त्यागपत्र

गोरखपुर जिले के कई थानों पर थानाध्यक्ष रहे इंस्पेक्टर यागवेंद्र बहादुर पाल सिंह ने पुलिस लाइन के आरआई को 23 सितंबर को त्यागपत्र दे दिया। यागवेंद्र सिंह ने किस वजह से त्यागपत्र दिया है इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कहीं न कहीं इसे काम के दबाव और छुट्टी न मिलने की वजह से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

एसपी ट्रैफिक ने दिया इस्तीफा

आगरा एसपी ट्रैफिक सुनीता सिंह ने 2 अगस्त 2018 को इस्तीफा दे दिया था। इनके इस्तीफे की खबर सुनते ही पुलिस महकमे के लोग सन्न रह गये। हर कोई एसपी के इस्तीफा देने का कारण जानना चाह रहा था। लेकिन एसपी ट्रैफिक ने आईजी कार्यलय भेजे अपने इस्तीफे में खुद पर दबाब महसूस करने पर स्वेच्छा से त्याग पत्र देने की बात कही थी।

सिपाही ने दिया इस्तीफा

पुलिसकर्मियों के लगातार ड्यूटी करने से वो अपने परिवार की देखभाल भी नहीं कर पाते इसकी वजह से भी पुलिसवाले तनाव में रहते हैं। इसी तनाव की वजह से 21 सितंबर को कांस्टेबल ने इस्तीफा दे दिया। मुकुल अपने मां और बाप का इकलौता बेटा है और अपने माता पिता का खास ख्याल रखता है। पुलिस की नौकरी ज्वाइन करने के बाद मुकुल घरवालों से दूर हो गया था और वो अपने परिजनों खासकर माता-पिता का ख्याल नहीं रख पा रहा था। इसलिए उसने नौकरी से इस्तीफा देकर घऱ वापसी का फैसला ले लिया।

प्रशिक्षण के दौरान दिया इस्तीफा

मुरादाबाद की नवीं वाहिनी पीएसी में 25 जुलाई से महिला सिपाहियों का छह माह का प्रशिक्षण शुरु हुआ था। इसमें बहराइच की रहने वाली अद्यना सिंह भी शामिल थीं। आठ अगस्त को वह मुरादाबाद से बहराइच चली गई। इसके बाद वह वापस नहीं आई और इस्तीफा भेज दिया। इसके बाद तत्कालीन आरटीसी प्रभारी भगवान स्वरूप हटा दिए गए। महिला सिपाही के इस्तीफा देने की वजह सामने नहीं आई।

चौकी इंचार्ज ने खुद को मारी गोली

श्रावस्ती में चौकी इंचार्ज ने बीते 23 सितंबर को खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। हालांकि आत्महत्या का कारण अभी तक पता नहीं लग पाया है। अज्ञात कारणों की वजह से चौकी इंचार्ज जमुनहा मनोज यादव ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली।

मुरादाबाद में तैनात सिपाही ने लगाई फांसी

मुरादाबाद जिले में नागफनी थाने में तैनात एक सिपाही ने 19 जून 2018 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। कांस्टेबल सोमराज बहेड़ी थाना इलाके के रुपपुर गां के रहने वाले थे। सोमराज दिवाकर की शादी पिछले साल दिसंबर 2017 में हुई थी।

कांस्टेबल ने इसलिए सुसाइड कर लिया क्योंकि शादी के बाद पता चला कि उसकी पत्नी के किसी और के साथ नाजायज संबंध हैं। कांस्टेबल ने इस रिश्ते को लेकर अपनी पत्नी को कई बार समझाया लेकिन वो नहीं मानी। जिससे तंग आकर उसने फांसी लगा ली।

मिला था सुसाइड नोट

फांसी लगाने से पहले सोमराज ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था जिसमें उसने अपनी मौत का जिम्मेदार अपनी पत्नी और उसके प्रेमी को बताया था। कांस्टेबल ने सुसाइड करने से पहले पत्नी के फोन पर एक मैसेज डाला था जो उस समय अपने मायके में थी।

थाना परिसर में महिला ने लगाई फांसी

उत्तर प्रदेश के बांदा में महिला सिपाही ने थाना परिसर में 4 सितंबर को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मिली जानकारी के मुताबिक महिला कांस्टेबल पिछले कई दिनों से बीमार चल रही थी। वहीं महिला के शरीर पर चोट के निशान मिलने से परिजन इसे हत्या बता रहे थे।

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