आखिर क्यों 7 अगस्त को मनाया जाता है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस ? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी ?

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पूरे देश में आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जा रहा है। यह पांचवां हथकरघा दिवस है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य हथकरघा उद्योग के महत्व और आमतौर पर देश के सामाजिक आर्थिक विकास में इसके योगदान के बारे में जागरूकता फैलाना है। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से अपील की थी कि हमें हैंडलूम की अपनी समृद्ध परंपरा और हुनरमंद बुनकरों के हुनर को दुनिया के सामने लाना चाहिए, ताकि इस विधा को रफ्तार मिल सके।

आखिर क्यों 7 अगस्त को मनाया जाता है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस ?

हथकरघा दिवस मनाने के लिए 7 अगस्त का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इस दिन का भारत के इतिहास में विशेष महत्व है। उल्लेखनीय है कि घरेलू उत्पादों और उत्पादन इकाइयों को नया जीवन प्रदान करने के लिए 7 अगस्त 1905 को देश में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ था। स्वदेशी आंदोलन की याद में ही 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

बहुत प्राचीन है हथकरघा उद्योग

भारत के लिए हथकरघा कोई नई बात नहीं है। ऐतिहासिक काल से कताई और बुनाई द्वारा कपड़ा बनाने की एक पुरानी परंपरा है, हथकरघा आज तक उनकी आजीविका के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी की रीढ़ रहा है। हथकरघा उद्योग प्राचीनकाल से ही हाथ के कारीगरों की आजीविका प्रदान करता आया है। हथकरघा उद्योग से निर्मित सामानों का विदेशों में भी खूब निर्यात किया जाता है। माना जाता है कि इस उद्योग के विभिन्न कार्यों में लगभग 7 लाख व्यक्ति लगे हुए हैं। लेकिन अगर उनकी आर्थिक स्थिति की बात की जाये तो कहा जा सकता है कि तमाम सरकारी दावों के बावजूद उनकी स्थिति दयनीय ही बनी हुई है।

सरकार ने 29 जुलाई, 2015 को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में अधिसूचित किया था। सरकार का प्रयास है कि गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और हथकरघा उद्योग का सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्तिकरण किया जा सके। सरकार कहती रही है कि वह बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने उस्ताद योजना के तहत बुनकरों के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था कराई जिससे उन्हें तकनीकी रूप से और समृद्ध किया जा सके।

योगी का गढ़ हो या मोदी का पूर्वांचल ...

यही नहीं, 2015 में जब राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत हुई तब कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने हथकरघा पर बने परिधानों को लोकप्रिय बनाने और बुनकर समुदाय को मदद पहुंचाने के लक्ष्य के साथ सोशल मीडिया पर ‘आई वियर हैंडलूम’ अभियान की शुरुआत की थी, जिसका कई मशहूर हस्तियों ने जमकर समर्थन किया था। इस अभियान के तहत मशहूर हस्तियों ने ‘आई वियर हैंडलूम’ हैशटैग के साथ हैंडलूम वस्त्र पहनी हुई अपनी तसवीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की थीं।

आईआईएमसीएए के छात्र हैं गौरव द्विवेदी

यह लेख पत्रकार गौरव द्विवेदी के द्वारा लिखी गई है, जो कि उनके निजी विचारों को व्यक्त करता है। बता दें कि गौरव द्विवेदी आईआईएमसीएए के छात्र हैं, जो कि अक्सर साम्प्रदायिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं।

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