बनारस स्टेशन के नाम से जाना जाएगा मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन

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बीएचयू से जारी है कोरोना मरीज के गायब होने का सिलसिला
कोरोना वार्ड से संदिग्ध हालात में गायब हुआ मरीज
परिजनों ने लंका थाने में दर्ज कराई शिकायत

बीएचयू के सुपरस्पेशलिटी वार्ड से मरीजों के गायब होने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को कोरोना वार्ड से एक और पेशेंट संदिग्ध हालात में गायब हो गया। परिजनों के अनुसार कोरोना पेशेंट को दस दिन पहले बीएचयू के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन शुक्रवार को अचानक उसके गायब होने की खबर आई। परिजनों ने लंका थाने में मरीज के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। गायब होने वाला पेशेंट शिवपुर इलाके का रहने वाला है।

बनारस स्टेशन के नाम से जाना जाएगा मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन
राज्यपाल आंनदीबेन पटेल ने दी मंजूरी
रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर दी जानकारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में स्थित मंडुआडीह रेलवे स्टेशन अब बनारस स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाम बदलने की अनुमति दे दी है। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर इस संबंध में जानकारी दी। रेलमंत्री पियूष गोयल ने लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मंडुआडीह स्टेशन को अब पूरे देश में लोकप्रिय व प्रसिद्ध नाम बनारस से जाना जाएगा। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा, केंद्र सरकार के अनापति पत्र के आधार पर इस स्टेशन का नाम परिवर्तित कर बनारस रखने की अनुमति दी गई।’ केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 17 अगस्त को मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए मंजूरी दे दी थी। गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया था कि मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

नाविकों के चेहरे पर दिखी मुस्कान
नाव संचालन पर लगी रोक की मियाद हुई खत्म
बाढ़ के मद्देनजर नाव संचालन पर लगी थी रोक

लॉकडाउन के बाद बाढ़ की मार झेल रहे नाविकों को नाव संचालन की अनुमति मिल गई है। जिलाधिकारी कौशक राज शर्मा के आदेश के बाद शुक्रवार से गंगा में नाव का संचालन शुरू हो गया । बीते 26 अगस्त को गंगा में बाढ़ के कारण नाव संचालक पर रोक लगा दी गई थी। लॉकडाउन के बाद बाढ़ की मार झेल रहे नाविकों के सामने इससे रोजी रोटी का संकट गहरा गया था। हालात ये थे कि काशी के कई नाविकों ने परिवार के जीवोपार्जन के लिए गहने तक गिरवी रख दिए थे। उसके बाद भी उन्हें आधे पेट ही भोजन कर रहना पड़ता था। वाराणसी में नाव संचालन की अनुमति के बाद वाराणसी के नाविकों के चेहरे खिल उठे। नाविकों में एक बार फिर से उम्मीद जगी है कि अब उनका रोजगार चलेगा और आर्थिक संकट से जूझ रहे नाविकों को राहत मिलेगी।

रोहनियां में सामने आया ग्रामीणों का शर्मनाक चेहरा
महिला के शव को दफनाने के लिए नहीं दी जमीन
स्थानीय प्रशासन ने भी नहीं दिया साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के रोहनिया इलाके से एक शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां के काशीपुर गांव एक बुजुर्ग महिला के शव को दफनाने को लेकर विवाद हो गया। महिला बंजारन थी और अपने समूह के साथ पिछले कुछ महीनों से गांव के ही एक बागीचे में शरण लिए थी। इसी बीच दो दिन पहले उसकी मौत हो गई। साथियों ने जब उसके शव को ग्राम सभा की जमीन पर दफनाने की कोशिश की तो ग्रामीणों ने हंगामा शुरु कर दिया। विवाद बढ़ता देख जिला प्रशासन के अधिकारियों को दखल देना पड़ा। बताया जा रहा है कि स्थानीय अधिकारियों ने शव को उसके पैतृक गांव में दफनाने का निर्देश दिया।

सब्जी विक्रेताओं ने जिलाधिकारी से की मुलाकात
सब्जी मंडी के लिए अलग जगह आवंटित करने की मांग
शिवपुर चुंगी के पास सालों से लगती रही है सब्जी मंडी

शिवपुर के ठेला पटरी व्यापारियों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा से मुलाकात की। व्यापारियों ने शिवपुर चुंगी के पास से सब्जी मंडी हटाए जाने के खिलाफ विरोध जताया। व्यापारियों का कहना था कि लॉकडाउन के चलते धंधा पहले ही मंदा है। चुंगी के पास सालों से सब्जी मंडी लगती रही है। ऐसे में अगर सब्जी व्यापारियों को हटाया जाता है तो इसके एवज में उन्हें नई जगह आवंटित की जाए, ताकि उनका व्यापार सुचारु रुप से चल सके।

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