विश्व सत्ता का केंद्र Washington DC; यात्रा वृत्तांत अजय त्रिवेदी के साथ

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न्यूयॉर्क के रोमांचकारी सफर के बाद हमारा अगला डेस्टिनेशन वो जगह थी जहां से दुनिया भर में अमेरिका की हुकूमत चलती है। न्यूयॉर्क से सड़क मार्ग होकर अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी तक का तकरीबन 400 किलोमीटर तक का सफर कब गुज़र गया पता ही नहीं चला। महज़ साढ़े तीन घंटों में एनवाय से वॉशिंगटन डीसी पहुंच गए वो भी बगैर थकान के।

दो वॉशिंगटन हैं अमेरिका में—

अमेरिका में वॉशिंगटन नाम से दो जगहें हैं। पहली वॉशिंगटन और दूसरी है वाशिंगटन डीसी। वॉशिंगटन जहां एक पूर्ण राज्य है वहीं दूसरी ओर वॉशिंगटन डीसी यानी कि वाशिंगटन डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलम्बिया एक तरह से केंद्र शासित क्षेत्र है। यह अमेरिका की राजधानी भी है।

वॉशिंगटन डीसी के सिटिज़न्स को राजधानी का नागरिक होने के बावजूद अमेरिकी संसद में रिप्रजेंटेशन का कोई स्पेशल राइट नहीं दिया गया। जबकि भारत की राजधानी दिल्ली में हाल ठीक इसके उलट है क्योंकि यहां तो पूर्ण राज्य का दर्जा तक मांगा जा रहा है।

अमेरिका में यूरोपियन नज़ारा—

अमेरिका के बाकी दूसरे शहरों से वॉशिंगटन एकदम अलग है। इमारत, सड़कें, आर्किटेक्चर सब कुछ यहां यूरोप का अहसास कराते हैं। वॉशिंगटन एक तरह से यूरोपियन स्थापत्य शैली में बसा शहर है। यहां नज़ारों को देखकर एक बारगी भ्रम हो सकता है कि आप अमेरिका नहीं बल्कि यूरोप के किसी शहर में हैं।

फिलाडेल्फिया थी राजधानी—

गगनचुंबी इमारतें न्यूयार्क सहित अमेरिका के दूसरे अन्य विकसित शहरों की पहचान हैं लेकिन वॉशिंगटन डीसी इस मामले में ज़ुदा है। दरअसल 1791 में वॉशिंगटन डीसी को कैपिटल का दर्ज़ा दिये जाने से पहले तक फिलाडेल्फिया संयुक्त राज्य अमेरिका (यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका) की राजधानी था। यहां की अधिकांश प्रमुख बिल्डिंग्स ने राजधानी का दर्ज़ा मिलने के बाद ही आकार ली।

वॉशिंगटन, पोटोमैक और जॉर्ज टाउन—

पोटोमैक नदी के किनारे डेवलप हुए वॉशिंगटन शहर का हिस्सा जॉर्ज टाउन भी है। पोटोमैक नदी पर बना की-ब्रिज ही वॉशिंगटन डीसी और जार्ज टाऊन डिस्ट्रिक्ट को जोड़ता है। जॉर्ज टाऊन डिस्ट्रिक्ट वर्ल्ड फैमस जॉर्ज टाऊन यूनिवर्सिटी के लिए जानी जाती है। यह यूनिवर्सिटी वर्ल्ड की टॉप 10 यूनिवर्सिटी में से एक है।

विश्व सत्ता का केंद्र—

आज वॉशिंगटन डीसी विश्व की सत्ता का केंद्र है। यहां पर ही अमेरिकी संसद भवन कैपिटल के साथ ही अमेरिका के प्रथम नागरिक यानी अमेरिकी राष्ट्रपति का विश्व प्रसिद्ध घर वाइट हाऊस भी है। इसके अलावा लिंकन मेमोरियल, वॉशिंगटन स्मारक और वियतनाम एवं कोरिया युद्ध स्मारक भी अमेरिका के इतिहास से परिचय कराते हैं। यह सभी टूरिस्ट डेस्टिनेशंस आस-पास होने से हमें भ्रमण में ज्यादा वक्त नहीं लगा और महज़ छह-सवा छह घंटों में ही हमने सभी जगहों की सैर कर डाली।

सिटी ऑफ म्यूज़ियम्स—

अमेरिका की राजधानी होने के साथ ही वॉशिंगटन डीसी म्यूज़ियम्स की लंबी श्रृंखला के लिए भी जाना जाता है। यहां दुनिया जहान की तमाम जानकारियों को समेटे एक-दो नहीं बल्कि पूरे 89 संग्रहालय विज़िटर्स को खासा पसंद आते हैं। कुछ म्यूज़ियम्स तो इतने विशाल हैं कि उनको देखने में पूरा दिन बीत जाये।

जब देखा हवाई जहाज़—

वॉशिंगटन डीसी के एयरो-स्पेस के साथ ही नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम से तो आपका बाहर निकलने का ही जी नहीं करेगा। एयरो स्पेस में हमें राइट बंधुओं द्वारा बनाए गए दुनिया के पहले हवाई जहाज़ को देखने का मौका मिला। मॉडर्न एज़ के जेट्स, फाइटर प्लेन के पूर्वज़ इस जहाज़ को देखकर अहसास हुआ कि बड़ी सफलता के लिए सतत लगन और कोशिश कितनी जरूरी है।

इसके अलावा नैचुरल हिस्ट्री संग्रहालय में प्रकृति और मानव-सभ्यता के विकास क्रम के बारे में भरपूर रोचक जानकारी मिली। कहा भी जाता है कि, अगर आपने वॉशिंगटन डीसी आकर इन दोनों संग्रहालयों को नहीं देखा तो फिर कुछ नहीं देखा। हमने भी इस ताकीद पर अमल किया और अद्भुत जानकारियों के कारण दोनों म्यूज़ियम्स ने हमारा दिल मोह लिया। दोनों को एक दिन में देख पाना मुनासिब नहीं था लेकिन समय की कमी के कारण मन मसोस कर हमें ऐसा करना पड़ा। यदि ज्यादा समय होता तो इन म्यूज़ियम्स और उनकी जानकारियों को और ज्यादा नज़दीक से जानने का मौका हमें मिलता।

बाकी अमेरिका से ज़ुदा है वॉशिंगटन डीसी—

वाशिंगटन डीसी सुव्यवस्थित तरीके से बसाया गया एक बेहद ही खूबसूरत शहर है। अमेरिका के दूसरे शहरों की भागमभाग भरी ज़िंदगी से उलट इस शहर में एक तरीके का ठहराव है, शांति है। आज के शब्दों में कहें तो वॉशिंगटन कूल यानी सुकून से भरा शहर है।

इंडियन होप डायमंड—

वॉशिंगटन डीसी के नैचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम में विश्व प्रसिद्ध होप डायमंड का दीदार करते वक्त उसकी चमक ने हमें मंत्रमुग्ध कर दिया। इस हीरे से जुड़ी जानकारियों को जानते वक्त हमारे ज़हन में भारत की संपन्न विरासत का इतिहास घूम रहा था। यह जानकर अफसोस भी हुआ कि भारत में गोलकुंडा खान से निकला यह हीरा अब अमेरिका के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम की शोभा बढ़ा रहा है।

पल में तोला-पल में माशा—

जी हां, यह कहावत अमेरिकन कैपिटल के म्यूज़ियम के लिए बिलकुल फिट बैठती है। यहां रखी मशीनों का आपको मात्र बटन बस दबाना है और वो आपका वजन पृथ्वी, चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति पर कितना होगा यह कैल्कुलेट करके चंद सेकंड में बता देंगी।

यह भी है एक रिकॉर्ड—

अमेरिका की राजधानी की खास जगहों ने हमें रोमांच से भर दिया लेकिन यह जानकर अचरज हुआ कि अमेरिका ने युद्ध में सबसे ज्यादा सैनिक गंवाए हैं। वार मेमोरियल पर शहीदों को हमने श्रद्धांजलि दी। अमेरिकी इतिहास के मुताबिक मात्र कोरिया के साथ हुए युद्ध में अमेरिका के पचास हजार से ज्यादा सिपाही मारे गए थे।

ठीक इसी तरह सेकंड वर्ल्ड वार के बाद हुए युद्धों में भी सबसे ज्यादा अमेरिका के ही सैनिकों ने प्राण गंवांए हैं। फिर, चाहे वो युद्ध कोरिया से हुआ हो, वियतनाम से या फिर इराक़-अफ़ग़ानिस्तान से। ऐसे में अमेरिका को महज़ भौतिकतावादी देश मानने वालों को अमेरिकंस की वीरता पर भी गौर करना होगा।

बेहद सुखद एहसास—

अमेरिका दौरे पर अपने बेटे के साथ वक्त गुज़ारना जीवन के सुखद अहसासों में से एक रहा। बेटे की देखरेख में बड़ा हो रहा दुनिया में सबसे आक्रामक माने जाने वाली नस्ल पिटबुल ब्रीड का डॉग भी हमारे साथ काफी हिल-मिल गया।

पिटबुल ब्रीड को आक्रामक मानकर यूरोप समेत कई देशों में इसे पालने पर पाबंदी है, लेकिन इस पिटबुल डॉग ने हमें किसी आक्रामकता का अहसास नहीं कराया।

 

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(यह एक यात्रा संस्मरण है। लेखक समय-समय पर विभिन्न स्थानों की यात्राएं किया करते हैं। उनके यात्रा संस्मरण आपको पढ़ने को मिलेंगे।)

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