akhilesh yadav

अखिलेश के ‘सपनों’ पर ईडी का शिकंजा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंड प्रॉजेक्ट के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छह बड़ी कंपनियों को समन जारी किया है। यह प्रॉजेक्ट पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रॉजेक्ट्स में से एक था। इस योजना में बड़ी वित्तीय अनियमितता की आशंका के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छह महीने पहले सीबीआई जांच की भी सिफारिश की थी।

जांच में सामने आया है कि जो कंपनियां ब्लैक लिस्टेड थीं

पिछले महीने ईडी ने कंपनियों की डीटेल रिपोर्ट तैयार करके इन्हें समन भेजा है। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जो कंपनियां ब्लैक लिस्टेड थीं, उन्हें ठेके दिए गए। इतना ही नहीं, इन कंपनियों को अधिक भुगतान भी किया गया।

हाईटेक कम्पेटेंट बिल्डिर्स प्राइवेट लिमिटेड और तराई कंस्ट्रक्शन

जिस राशि पर ठेका दिया गया, उससे अधिक भुगतान किया गया। जिन कंपनियों को ईडी ने समन जारी किया है उनमें से गैमन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, केके स्पून पाइप प्राइवेट लिमिटेड, रिशु कंस्ट्रक्शन, हाईटेक कम्पेटेंट बिल्डिर्स प्राइवेट लिमिटेड और तराई कंस्ट्रक्शन हैं। ईडी की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन कंपनियों को ठेके की राशि तक नहीं दी जानी चाहिए थी उन कंपनियों को ज्यादा भुगतान कर दिया गया। अधिकांश ठेके लगभग 13 ठेके तराई को दिए गए और उसे भी अधिक भुगतान कर दिया गया।

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कई राज्यों में ब्लैक लिस्टेड हो चुकी गैमन इंडिया को दो ठेके दिए गए, वह भी सबसे ऊचे रेट 665 करोड़ पर। इस कंपनी को भी काम से ज्यादा भुगतान किया गया। वहीं केके स्पून कंपनी तो टेंडर के लिए योग्य ही नहीं थी।

जल्द समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा

यहां तक कि कंपनी बेसिक योग्यताएं भी पूरी नहीं कर रही थी, जैसे सिंचाई विभाग में पंजीकरण। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी को ठेका पहले दे दिया गया और बाद में कंपनी सिंचाई विभाग में पंजीकृत हुई। ईडी के सूत्रों ने बताया कि समाजवादी पार्टी के सरकार के दौरान विभाग से जुड़े अधिकारी और मंत्रियों को भी जल्द समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। आजतक एनबीटी

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