घबराइए मत, सबको अल्लाह, गॉड और ईश्वर बचा लेंगे!

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ये कोरोना तो ऊपरवाले का दूत है… वहां हूरें और अप्सराएं आपसे मिलने को फड़फड़ा रही हैं! अल्लाह-अल्लाह करते रहिए… राम नाम जपते रहिए! घबराइए मत सबको अल्लाह, गॉड और ईश्वर बचा लेंगे! और जो मर रहे हैं उन्हें अल्लाह, गॉड और ईश्वर अपने पास बुला रहे हैं। वो खुशकिस्मत हैं! बड़ी ताकत है दाढ़ी, टोपी, चुटिया, तिलक और क्रॉस में।

ये कोरोना वायरस कोई खराब चीज थोड़ी है! ये तो ऊपरवाले का भेजा दूत है! पकड़ लेगा तो जन्नत ही नसीब होगी। जो बचेंगे उन्हें ये पापी डॉक्टर बचाएंगे। ये साले डॉक्टर धरम-करम की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। कर्म का सारा सिद्धांत पलट देते हैं!

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इसलिए वायरस पकड़ ले तो इन हरामखोरों के पास नहीं जाना है! बस कंठी लेकर राम नाम जपना है, अल्लाह अल्लाह करना है! बड़ी ताकत है इनमें। हर सूरत में इंसाफ यानी न्याय ही करेंगे! और इनके न्याय में तो फायदा ही फायदा है। बच गए तो कुछ दिन धरती लोक का भोग और कर लेंगे। व्यवस्था है ही। और नहीं बचे तो ऊपरवाले के पास रहेंगे। जन्नत की हूरें भी तो इंतजार कर रही हैं। इंदर की सभा में मेनका और रंभा का मुजरा भी तो देखना है!

लिहाजा अपनी अपनी इबादतगाहों में सामूहिक प्रार्थना जारी रखिए। लाउडस्पीकर पर ऐलान करते रहिए। ये ससुरे डॉक्टर और पत्रकार तो कुत्ते हैं… भौंकते रहते हैं।

असली बात तो मुल्ला, पंडा और पादरी ही बताता है। इनकी सुनिए। इनमें देवता का अंश है। ये सीधे जन्नत में सीट रिजर्व कराते हैं। खुदा करे कि आप सबको जन्नत और स्वर्ग नसीब हो! हूरो और अप्सराओं से मिलन का इंतजार खत्म हो!

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और हां… वहां “शाहरुख” के लिए हूरें हैं तो “गौरी” के लिए भी कोई न कोई व्यवस्था होगी ही! घबराने का नहीं है। क्या पता बतौर हूर ही भर्ती हो जाए। अप्सरा बन जाए। इतने “शाहरुख” पहुंचेंगे तो हूरों की नई वैकेंसी खोलनी ही पड़ेगी। ऐसा हुआ तो बल्ले ही बल्ले है। यहां एक “शाहरुख” और वहां अनेक “शाहरुख”!

यह लेखक के अपने विचार हैं, यह लेखक के फेसबुक वॉल से लिया गया है।

समरेंद्र सिंह वरिष्ठ पत्रकार

और आप “महान” लोगों के चक्कर में मेरे जैसे कुछ कमीने मरे तो आपके दर्शन के मुताबिक हमारे लिए नर्क का खौलता कड़ाहा है ही! यहां आप लोग फ्राई कर रहे हो वहां भी फ्राई हो लेंगे। वैसे भी चचा ग़ालिब कह गए हैं … जिस जन्नत में लाखों बरस की हूरें हो, उस जन्नत का क्या करे कोई! तो हमें नरक मुबारक और आप सबको जन्नत। लो कोरोना, लो कोरोना… जय कोरोना, जय कोरोना! मौज करो ना … मौज करो ना!!

 

 

 

-Adv-

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