लखनऊ: कोरोना को लेकर अस्पतालों की बदइंतजामी से टूटा पत्रकार का सब्र, विरोध करने पर सिक्योरिटी गार्ड्स ने पीटा

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कोरोना काल में अस्पतालों की बदइंतजामी और मरीजों की मनोदशा का न समझ पाना तमाम मौतों की वजह रही है। वरिष्ठ पत्रकार राधे श्याम दीक्षित (Radhey Shyam Dixit) कोरोना संक्रमित हुए, पहले तो सीएमओ दफ्तर से कोई सुनवाई नही हुई, फिर तमाम फोन-सिफारिश-मनुहार के बाद उन्हें टीएस मिश्रा अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अव्यवस्थाओं से राधेश्याम दीक्षित का टूटा सब्र

उनका आरोप है कि कोरोना मरीजों को सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिम्मे ही छोड़ दिया गया है। सांस की दिक्कत होने पर व तबियत बिगड़ने पर बार-बार डाक्टर से मिलने की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अव्यवस्थाओं के अंबार से राधेश्याम दीक्षित के सब्र का बांध टूट गया। उन्होने अपने स्तर से इसका जमकर विरोध किया। किसी जिम्मेदार से बात कराने की मांग पर सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने तीखा विरोध दर्ज कराया।

T.S Hospital लखनऊ |मित्रो एक पत्रकार राधे श्याम दीक्षित जिनकी खुद की Report नेगिटिव थी फिर भी इन्हें जबरदस्ती को-रोना का मरीज बताया गया.. इनके अनुसार इसी तरह की साजिश हॉस्पिटल में अन्य मरीजों के साथ की जा रही है , जब हास्पिटल वालो को पता चला कि ये एक पत्रकार है और अब हास्पिटल की पुरी पोल खुल जाएगी तब हास्पिटल वालों ने इन्हें पागल घोषित कर दिया और इनके साथ मारपीट की |इस विडियो को अवश्य शेयर करें !

Posted by Gourav Rathor on Saturday, August 22, 2020

पत्रकार राधे श्याम दिक्षित का आरोप है कि सिक्योरिटी गार्ड्स ने इन्हें कमरे में बंद करके पीटा, जब कुव्यवस्थाओं को उजागर करने की बात की तो इन्हें मानसिक बीमार करार देने की कोशिश की गई। इन्हें सिक्योरिटी गार्ड्स पकड़ कर बाहर ले जा रहे थे, लेकिन उसी वक्त कुछ अधिवक्ताओं व पत्रकारों के अस्पताल पहुंचने पर इन्हें छोड़ा गया।

सदन में MLC सुनील यादव साजन ने किया जिक्र

पीजीआई में व्याप्त अराजकता-मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार का जिक्र सदन में एमएलसी सुनील यादव साजन ने किया था। आपदा के इस काल को तमाम अस्पतालों ने लाभ कमाने का अवसर बना लिया है। मरीजों की मनोदशा से किसी को कोई इत्तेफाक नहीं दिखता। आम मरीज तो खुद को बदकिस्मत मानकर लाचारी में सब सह लेता है, लेकिन एक पत्रकार कुव्यवस्थाओं को आसानी से पचा नहीं पाता और मुखर हो जाता है। फिर उसके साथ क्या होता है ये राधेश्याम दीक्षित की दशा बता रही है… इनकी घेराबंदी करने-उलटा इन्हें ही कुसूरवार ठहराने की कोशिशें की जा रही हैं….।

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