बक्सवाहा जंगल बचाने एकजुट MP-UP, लेकिन किसकी तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए?

मध्य प्रदेश : सरकार क्यों चाहती है बक्सवाहा जंगल के दो लाख हवादार वृक्ष काटना?

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बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) जो MP-UP सीमा से जुड़ता है, को कटने से बचाने के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के नागरिक एकजुट हो रहे हैं. कोई खून से खत लिख रहा है तो कोई एमपी की शिवराज सरकार को आपदा से सीख लेने की ताकीद दे रहा है.

जंगल की कीमत

मध्य प्रदेश (एमपी/MP) के छतरपुर जिले में बक्सवाहा जंगल क्षेत्र की जमीन में तकरीबन पचास हजार करोड़ रुपये ( Rs 50000 crore) के आसपास हीरा मिलने की संभावना पता चलने के बाद से बक्सवाहा जंगल सुर्खियों में है.
“उत्खनन के लिए ढाई लाख से ज्यादा पेड़ों पर आरी चलेगी” यह पता चलने के बाद से वन अधिकार कार्यकर्ता इस वन भूमि से जुड़े वन्यप्राणियों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए चिंतित हैं.
महज हीरा उत्खनन के लिए बहुमूल्य जंगल को उजाड़ने का प्रतिकूल असर आमजन से जुड़ने के कारण वृक्षों को काटने का पुरजोर विरोध भी प्रबल है.
सोशल मीडिया पर बक्सवाहा जंगल सहेजने के लिए एक हैश टैग (#Save_Buxwaha_forest) सेव बक्सवाह फॉरेस्ट भी ट्रेंडिंग में है.
बेशकीमती खनिज हीरा मिलने की संभावना पता चलने पर जीवनदाता तुल्य वृक्षों को कत्ल करने की तैयारी की जा रही है! वो भी उस कालखंड में जब कोरोना संक्रमण आघात से जूझ रही दुनिया ऑक्सीजन की किल्लत का सामना कर रही हो!

जंगल जरूरी या हीरा?

बक्सवाहा जंगल को हीरा खनन के लिए कटवाने के विरोध में पर्यावरण कार्यकर्ता आंदोलित हैं. भारत के मानचित्र पर बक्सवाहा आंदोलन के कारण सुर्खियों में आ गया है.
टि्वटर पर बक्सवाहा जंगल को बचाने ट्रेंड कर रहे हैश टैग सेव बक्सवाहा फॉरेस्ट (#savebaxwahaforest) पर मीम्स, जुमलों की भरमार है. आपको बता दें बक्सवाहा जंगल भूमि में से बेशकीमती खनिज निकालने के लिए राज्य सरकार ने एक निजी कंपनी को बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) 50 साल की लीज पर प्रदान किया है. हालांकि जंगल भूमि के खनन से कितना खनिज निकेलेगा यह अभी सिर्फ अनुमान ही है.

अनुमान यह है

जैसा कि अनुमानित किया गया है 382.131 हेक्टेयर की भूमि के खनन से बेशकीमती हीरे मिलेंगे. इस हीरे को हासिल करने के लिए ही अब यहां ढाई लाख से ज़्यादा की तादाद में उम्र दराज़ वृक्षों पर आरी चलने वाली है. तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने इसके लिए हामी भी भर दी है.

बुंदेलखंड में विरोध के स्वर

कोविड-19 (COVID-19) जनित ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे भारत के लोगों को मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार का यह निर्णय रास नहीं आ रहा है. अब ऐसे में बुंदेलखंड के लोगों ने बेशकीमती प्राण रक्षक जंगल को बचाने सरकार के खिलाफ़ मुहिम छेड़ दी है.

जानिये बक्सवाहा प्रोजेक्ट क्या है

आपको बता दें: मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले के बक्सवाहा में बंदर प्रोजेक्ट के लिए 20 साल पहले सर्वे शुरू हुआ था. मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी शासित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chouhan) की राज्य सरकार ने दो साल पहले बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) की नीलामी की है.
बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) की जमीन को आदित्य बिड़ला ग्रुप की इकाई एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड ने खनन के मकसद से खरीदा है. ध्यान दें, हीरा भंडार मिलने की संभावना रखने वाली जंगल की 62.64 हेक्टेयर जमीन को मध्य प्रदेश सरकार ने लीज पर सौंपा है.

लीज का पेंच

इस कंपनी के पास बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) की जमीन 50 साल तक लीज पर रहेगी. हालांकि कंपनी की नजर सरकार की ओर से प्रदान की गई जंगल की लीज से अधिक दायरे पर है. कंपनी ने डायमंड माइनिंग के लिए 382.131 हेक्टेयर जंगल भूमि मांगी है. अतिरिक्त भूमि के लिए कंपनी ने तर्क दिया है कि; बाकी 205 हेक्टेयर जमीन खदानों के मलबे का ढेर जमा करने में उपयोग होगी.

इतने निवेश के लिए

रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी मध्य प्रदेश के बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) की जमीन से जुड़े इस प्रोजेक्ट में 2500 करोड़ रुपए का निवेश करेगी. इसमें वन्य भूमि के गर्भ में छिपे हीरा (Diamond) को निकालने के लिए ढाई लाख से अधिक पेड़ों को काटा जाएगा. इस जन विनाशक काज के लिए वन रक्षक वन विभाग ने तो पेड़ों की गिनती भी कर ली है.

इतनी वन्य संपदा से आच्छादित

बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) में सागौन, जामुन, हेड़ा, पीपल. तेंदु, महुआ समेत कई बेशकीमती वृक्ष हैं जो योजना शुरू होते ही कालातीत हो जाएंगे. सनद रहे; बिड़ला से पहले ऑस्ट्रेलियाई कंपनी रियोटिंटो ने बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) की लीज हासिल की थी. हालांकि मई 2017 में पर्यावरण मंत्रालय का अंतिम फैसला आता इससे पहले ही रियोटिंटो ने डेरा समेट लिया.

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अंतिम फैसला आने तक कंपनी बिना अनुमति 800 से ज्यादा पेड़ों पर कुल्हाणी चलवा चुकी थी. एक मोटे अनुमान के अनुसार बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) की जमीन के नीचे 50 हजार करोड़ रुपये के हीरे उत्खनन से मिल सकते हैं.

एमपी-यूपी के साथ देश एकजुट

एमपी के बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) को कटने से बचाने के लिए जन संगठनों के साथ ही आम जन का भी साथ मिलता नजर आ रहा है. उत्तर प्रदेश के हमीरपुर के लोगों ने जंगल को बचाने के लिए खून से चिट्ठी लिखकर सरकार के फैसले का विरोध किया है.

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मध्य प्रदेश के बक्सवाहा जंगल (Bakswaha forest) को बचाने बुन्देलखंड क्रांति दल के सदस्यों ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित पत्र खून से लिखकर सरकार के फैसले का विरोध किया. हैश टैग सेव बक्सवाहा फॉरेस्ट (#savebaxwahaforest) पर भी देश-विदेश के प्रकृति प्रेमी अपना विरोध जता रहे हैं, राय रख रहे हैं.

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