मूडीज ने भारत की रेटिंग घटाकर ‘नेगेटिव’ की

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आर्थिक सुस्ती को लेकर बढ़ती चिंताओं और कर्ज को देखते हुए शुक्रवार को मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने भारत की रेटिंग को ‘स्टेबल’ से घटाकर ‘नेगेटिव’ कर दिया।

मूडीज का कहना है कि पहले के मुकाबले ग्रोथ की रफ्तार कम रहेगी।

सरकार ने क्‍या कहा

सरकार ने कहा कि मूडीज के रेटिंग डाउग्रेड करने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेज रफ्तार आगे बढ़ने वाली अर्थव्‍यवस्‍था में शामिल है।

पिछले वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक में आईएमएफ ने कहा था कि वित्त वर्ष 2019 में भारत का ग्रोथ रेट 6.1% रहेगा।

जबकि 2020 में यह बढ़कर 7% हो जाएगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था का पोटेंशल बढ़त रेट बरकार है।

आईएमएफ का मूल्यांकन और कई अन्य संस्थाओं का आउटलुक भी भारत के लिए सकारात्मक है।

मूडीज ने क्‍या कहा

सरकार ने पूरी अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

वैश्विक सुस्ती को देखते हुए सरकार ने कई नीतिगत फैसले भी लिए हैं।

जिनकी वजह से भारतीय इकॉनमी के लिए आउटलुक पॉजिटिव हो सकता है।

इस वजह से निवेश आकर्षित होगा।

रेटिंग एजेंसी का अनुमान भारत सरकार के लिए झटका

मूडीज ने कहा है कि सरकार आर्थिक सुस्ती को दूर करने में सफल नहीं रही है।

पहले के मुकाबले ग्रोथ की रफ्तार कम रहेगी।

हालांकि, एजेंसी ने भारत के लिए बीएए2 विदेशी-मुद्रा एवं स्थानीय मुद्रा रेटिंग की पुष्टि की है।

कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और जीडीपी ग्रोथ की धीमी रफ्तार को देखते हुए मूडीज का अनुमान है कि मार्च 2020 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष के दौरान बजट घाटा जीडीपी का 3.7% रह सकता है।

इसका टारगेट 3.3 पर्सेंट रखा गया था।

अक्टूबर 2019 में मूडीज ने 2019-20 में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 5.8 पर्सेंट कर दिया था, जिससे पहले मूडीज ने इसके 6.2 फीसदी का अनुमान जारी किया था।

एजेंसी ने एक बयान में कहा, ‘मूडीज ने भारतीय इकॉनमी की ग्रोथ से जुड़े जोखिमों को देखते हुए रेटिंग घटाई है।

इकॉनमी धीमी गति से आगे बढ़ेगी

स्पष्ट है कि पहले के मुकाबले इकॉनमी धीमी गति से आगे बढ़ेगी, जिसका मुख्य कारण सरकार की नीतियों का कम कारगर होना है।

मूडीज का अनुमान है कि कर्ज का भार धीरे-धीरे बढ़कर ज्यादा हो सकता है।’

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