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लखनऊ महोत्सव में आकर्षण का केंद्र बना है हैंडीक्राफ्ट और साज-सज्जा का समान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 25 नवंबर से शुरू हुए लखनऊ महोत्सव की छटा देखते ही बनती है। इस महोत्सव का शहरवासियों को पूरे साल बेसब्री से इतंजार रहता है। क्योंकि इस मेले में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के लिए कुछ न कुछ होता है।

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बल्कि घर की सजावट के लिए भी आप बहुत कुछ खरीद सकते हैं। महोत्सव को शहर के बाहर लगाया जाता है क्योंकि इसे देखने के लिए जनसैलाब उमड़ता है ऐसे में किसी को कोई परेशानी न हो इसका ख्याल भी पूरी तरह से रखा जाता है।

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लखनऊ महोत्सव में तरह-तरह के स्टॉल लगाए हैं जिसमें हैंडीक्राफ्ट, घरेलू साज-सज्जा, कालीन की दुकानें, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत भी कई सारे स्टॉल गाए हैं।

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लखनऊ महोत्सव इस बार इसलिए भी खास है क्योंकि यहां पर ग्रामीण परिवेश को दिखाने की पूरी कोशिश की गई है।

अटल संस्कृति अटल विरासत थीम पर चल रहे इस महोत्सव में अटल गांव बनाया गया है जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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कहते हैं हिंदुस्तान की आत्मा गांवों में बसती है। ऐसा स्वाभाविक भी है क्योंकि हरे-भरे खेत, खेतों में काम करते किसान, नदियों में बहता पानी, गिरते झरने जहां मिलावट और दिखावट का शायद ही कुछ असर दिखाई दे।

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तो जब हिंदुस्तान की आत्मा गांवों में बसती है तो उसकी झलक भी हर जगह दिखाई देनी ही चाहिए। गाय, भैंस, गोबर, कंडे, मिट्टी के मकान, फूस के छप्पर, कुआं, बावली, मिट्टी का चूल्हा जैसी झलक भी लखनऊ महोत्सव में खूब दिखाई दे रही है।

लखनऊ महोत्सव में क्राफ्ट्स एंड क्रिएशन नाम से हैंडीक्राफ्ट्स का स्टॉल लगाने वाले भावेश कदम बताते हैं कि, इस बार का महोत्सव काफी खास है क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ है कि इतनी ज्यादा भीड़ उमड़ रही है और हाथों हाथ सामान भी बिक गया है।

पुरानी घड़ियों के स्टॉल, कालीन, दरी, घरों के सजावटी सामान के साथ-साथ अवधी स्वाद का आनंद लेने के लिए भी लखनऊ महोत्सव की तरफ लोग दौड़े चले आ रहे हैं।

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राजस्थानी संस्कृति स्वाद और कला का भी अद्भुत

किसी को वाहिद की बिरयानी पसंद आ रही है तो कोई लखनवी कवाब का लजीज स्वाद लेने के लिए मेले की तरफ खिंचा चला आ रहा है।

महोत्सव में राजस्थानी संस्कृति स्वाद और कला का भी अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। राजस्थानी व्यंजनों के साथ ही वहां की लोक परंपरा और कला की झलक पाने के लिए लोग आ रहे हैं।

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