ARVIND KEJRIWAL

भाजपा के इस दांव से मुश्किल में आये केजरीवाल

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डी पी वत्स को हरियाणा से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बना कर बीजेपी ने एक तीर से कई शिकार किए हैं। वत्स के जरिए पार्टी प्रदेश में ब्राह्मण और फौजी वोटर्स अपने साथ जोड़े रखने में कामयाब हो पाएगी। हालांकि इससे बड़ी बात यह होगी कि हरियाणा में अपना जनाधार बढ़ाने में जुटे अरविंद केजरीवाल की सियासी पिच पर इस कदम ने पानी डाल दिया है।

केजरीवाल के लिए ये चुनौती…

वत्स हिसार से ही हैं और इससे पहले यहीं से बीजेपी सुभाष चंद्रा को भी राज्यसभा भेज चुकी है। यहीं से केजरीवाल हरियाणा में पांव पसारने की सोच रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस और इनेलो को भी अपने पारंपरिक गढ़ हिसार में अब ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

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सोमवार को सीएम मनोहरलाल खट्टर और राज्य बीजेपी अध्यक्ष सुभाष बराला सहित राज्य के कई मंत्रियों की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर अपना पर्चा भरा। वत्स का चुना जाना तय है।

अमित शाह की जींद रैली के बाद अरविंद केजरीवाल आगामी 25 मार्च को हिसार से हरियाणा में मिशन 2019 की शुरुआत कर रहे हैं। हरियाणा में जाट और गैर जाट के बीच चल रही राजनीति में यह चर्चा आम है कि केजरीवाल के यहां बनिया और ब्राह्मण समुदाय के वोटरों को ज्यादा से ज्यादा अपनी तरफ लाने की कोशिश करेंगे। यही वजह है कि दिल्ली के सीएम ने हरियाणा में पार्टी का परचम बुलंद करने वाले ब्राह्मण समुदाय के नवीन जयहिंद को आगे बढ़ाया।

हिसार से ताल्लुक रखना भाजपा के हक में…

खुद मूल रूप से अरविंद केजरीवाल हिसार से ही हैं। अपनी मौजूदगी से वह अपने समुदाय यानी बनिया जाति के वोटरों को आम आदमी पार्टी के पक्ष में लगे हुए थे। लेकिन बीजेपी के इस नए दांव से केजरीवाल और जयहिंद की मेहनत बढ़ जाएगी। डीपी वत्स का हिसार से ताल्लुक रखना बीजेपी के हक में जाएगा। गैर जाट वोटों में जातिगत पकड़ मजबूत करने की चुनौती नए प्लेयर केजरीवाल से जयादा पुराने कांग्रेस और इंडियन नैशनल लोकदल के लिए होगी।

NBT

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