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अन्डरवर्ल्ड दाऊद के करीबी को प्रत्यर्पित करेगा थाइलैंड

थाइलैंड में एक आपराधिक अदालत ने फैसला दिया है कि दाऊद इब्राहिम का एक करीबी गुर्गा पाकिस्तानी नहीं है, बल्कि एक भारतीय नागरिक है। सैयद मुजक्किर मुद्दसर हुसैन उर्फ मोहम्मद सलीम और मुन्ना झिंगड़ा दाऊद की डी कंपनी का अहम हिस्सा है और भारत में मोस्ट वॉन्टेड अन्डरवर्ल्ड अपराधी दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील का करीबी है।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का संरक्षण मिला हुआ है

मुन्ना झिंगड़ा फर्जी पाकिस्तानी पासपोर्ट पर बैंकॉक गया था और साल 2000 से वहां की जेल में बंद है। उसपर दाऊद के दुश्मन छोटा राजन की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। झिंगड़ा के पिता मुद्दसर नुसैन की 1993 मुंबई धमाके में भी बड़ी भूमिका रही है और उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का संरक्षण मिला हुआ है।

सजा को पहले कम कर के 34 साल कर दिया गया

थाइलैंड में पाकिस्तानी दूतावास के जरिए भी झिंगड़ा की सजा को कम करवाने की कोशिशें की गई जिसमें सफलता भी मिली। मुन्ना झिंगड़ा की सजा को पहले कम कर के 34 साल कर दिया गया।

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इसके बाद थाइलैंड में पाकिस्तानी मिशन ने फिर से राजा से माफी लेने में सफलता पाई और 2016 में मुन्ना झिंगड़ा की सजा घटकर 18 साल रह गई। पाकिस्तानी अधिकारी सजा माफी के जुगाड़ के साथ-साथ थाइलैंड के साथ प्रत्यर्पण संधि के तहत मुन्ना के पाकिस्तान प्रत्यर्पण के लिए भी काम करते रहे। हालांकि, भारत ने इस कदम का कड़ा विरोध किया और मुन्ना के प्रत्यर्पण के लिए दावा किया, जिसके बाद यह मामला थाइलैंड कोर्ट पहुंचा।

विचाराधीन होने के कारण उसे प्रत्यर्पित नहीं किया गया

इस बीच, थाइलैंड के कानूनों के तहत झिंगड़ा की पूरी सजा माफ हो गई और उसे दिसंबर 2016 में रिहा भी कर दिया जाता, लेकिन मामला विचाराधीन होने के कारण उसे प्रत्यर्पित नहीं किया गया। हालांकि, बुधवार को कोर्ट ने भारत द्वारा दिए गए फिंगर प्रिंट के नमूनों के आधार पर यह फैसला दिया है कि मुन्ना झिंगड़ा भारतीय नागरिक है।

90 दिनों के अंदर झिंगड़ा को भारत प्रत्यर्पित कर देगा

कोर्ट ने पाकिस्तान से भी कहा है कि वह थाइलैंड में अपने दूतावास के जरिए इस मामले में सबूत जमा करे। खबरों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। फैसला सुनाए जाने के बाद झिंगड़ा ने जज को अपशब्द तक कहे। इतना ही नहीं पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों ने भी गुस्सा जाहिर किया। अब इस्लामाबाद के पास अपील दायर करने के लिए 30 दिन का समय है। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो थाइलैंड 90 दिनों के अंदर झिंगड़ा को भारत प्रत्यर्पित कर देगा।साभार

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