कोरोना वैक्सीन लगवाइए, फिक्स डिपोजिट पर अधिक ब्याज पाइए

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भारत में कोरोना को हराने के लिए जरूरी वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी, गैरसरकारी संस्थाएं अपने-अपने स्तर से प्रयास कर रही हैं. अब बैंक भी आगे आए हैं. कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए अपने कस्टमर्स को प्रेरित करने को फिक्स डिपोजिट पर अधिक ब्याज दे रहे हैं. ऐसे में कस्टमर्स को डबल बेनिफिट मिल रही है, कोरोना से बचाव भी और रुपये भी.

अलग-अलग है स्कीम

कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले कस्टमर्स को फिक्स डिपोजिट पर अधिक ब्जाय देने वालों में यूको बैंक भी शामिल है. जिन आवेदकों ने कम से कम कोविड वैक्सीन की एक डोज ले ली है बैंक उनको 999 दिनों की FD पर 30 बेसिस पॉइंट्स या 0.30 प्रतिशत अधिक ब्याज दर देगा. इस स्कीम को UCOVAXI-999 ऑफर नाम दिया है. यह सीमित अवधि के लिए है. कस्टमर इसका लाभ 30 सितंबर तक ले सकते हैं. बैंक आफ इंडिया भी कुछ ऐसी ही स्कीम चला रहा है. इसका नाम इम्यून इंडिया डिपॉजिट स्कीम है. इसमें वैक्सीनेशन कराने वालों के लिए लागू कार्ड दर से 25 बेसिस पॉइंट्स की अतिरिक्त ब्याज दर दे रहा है. नए ऑफर की मैच्योरिटी 1,111 दिनों की है.

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जल्द ही सबको सुलभ होगी वैक्सीन

देश के हर नागरिक को कोरोना वैक्सीन मिल सके सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है. इसके तहत ही निजी अस्पतालों में वैक्सीन लेने वालों का दायरा बढ़ाने के लिए भी अहम कदम उठाने जा रही है. वैक्सीन के लिए विशेष नॉन ट्रांसफरेबल इलेक्ट्रॉनिक डिबेंचर का प्रविधान किया जाएगा. इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के लिए वैक्सीन खरीद सकेगा. गवर्नमेंट कोरोना वैक्सीन पर इस वित्त वर्ष में 450 अरब रुपये खर्च कर सकती है. हेल्थ मिनिस्ट्री का कहना है कि सोमवार तक देश में COVID-19 वैक्सीन खुराक की संख्या 23.59 करोड़ से अधिक हो गई है.

विकास में पीछे लेकिन वैक्सीनेशन में सबसे आगे निकला जम्मू-कश्मीर का वेयान

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को आतंकवाद ने डेवलपमेंट में बहुत पीछे कर दिया है. तमाम इलाके अभी हैं जहां आतंकवादियों का गढ़ है. वहां किसी तरह की सुविधाएं नहीं है. एजुकेशन की तो बात ही नहीं है. इन्हीं में से एक है उत्तरी कश्मीर की में दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसा वेयान. इसकी गिनती पिछड़े गांवों में होती लेकिन कोरोना वैक्सीनेशन के मामले में यह पूरे देश में सबसे आगे हो गया है. गांव में 18 प्लस सभी को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है.

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इस गांव में सड़क ना इंटरनेट

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मजबूत गढ़ कहे जाने वाले बांदीपोर के इस गांव वेयान में विकास लगभग हुआ ही नहीं है. गांव में सड़क, पेयजल का इंतजाम नहीं है. इंटरनेट, स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं हैं. गांव की लगभग 99वें फीसद आबादी गुज्जर-बक्करवाल समुदाय पर आधारित है. ज्यादातर घुमंतु हैं जो गर्मियों में अपने परिवार और मवेशियों के साथ ऊंचे पर्वतीय इलाकों में चले जाते हैं. एलओसी के साथ सटे जिला बांदीपोर मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर बसा है गांव.

आसान नहीं था सभी को वैक्सीन लगाना

वेयान गांव में सभी एडल्ट को वैक्सीन लगाना आसान नहीं था. मेडिकल टीम लम्बी दूरी पैदल चलकर गांव तक पहुंचती और लोगों को टीका लगाती थी. बांदीपोर के चीफ मेडिकल अफसर बशीर अहमद की मानें तो गाांव में पहुंचने के लिए मेडिकल टीम को 18 किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता था. पहाड़ी पर बसे गांव तक पहुंचने के लिए रोड सिर्फ 10 किलोमीटर तक ही है. इसके आगे के 18 किलोमीटर का सफर मेडिकल टीम को पहाड़, नाले और जंगल करना पड़ता था. गांव में कुल 362 लोगों को टीका लगाया गया है.

काम कर गया वैक्सीनेशन का माॅडल

जम्मू-कश्मीर में भी वैक्सीन को लेकर काफी भ्रम था लेकिन यहां अपना गया टीकाकरण माडल जबरदस्त सफल रहा है. इसका असर हुआ कि 45 के पार की लगभग 72 फीसद आबादी का टीकाकारण हो चुका है. जम्मू, शोपियां और गांदरबल में सौ फीसद टीकाकरण हुआ है. सांबा जिले में 98.37 फीसद लोग टीका लगवा चुके हैं. वैक्सीनेशन का जो माडल लागू किया गया वह दस बिंदुओं पर आधारित है. इसमें टीकाकरण योग्य आबादी तक पहुंच बनाने के लिए पहले बूथ स्तर पर प्रयास किया गया. दूरदराज की आबादी के लिए वैक्सीन ऑन व्हील्स अभियान चला. एक दिन में अधिकतम जगहों पर पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा लोगों के टीकाकरण के लिए विशेष सत्र का आयोजन हुआ. हर जिले में डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के टीकाकरण के लिए विशेष दल तैयार किए गए. इनमें उन स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल किया गया जो स्वेच्छा से अवकाश के दिन भी काम करने को तैयार थे. एलजी मनोज सिंहा लगातार मानीटरिंग कर रहे हैं.

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