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मायावती की दुखती रग से कम नहीं है ‘गेस्ट हाउस कांड ‘ पढ़े क्या हुआ था उस दिन

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने आज शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सियासी भूचाल ला दिया है। 25 साल बाद सपा और बसपा एक साथ नजर आएं। कहने को इस दौरान कई बाते कही गई लेकिन मायावती ने एक जिक्र किया वो था ‘गेस्ट हाउस कांड ‘।  क्या आप जानते है आखिर क्या है गेस्ट हाउस कांड। आइए आपको बताते है गेस्ट हाउस कांड। 

पिछले दो दशकों में जब-जब भी एसपी और बीएसपी के गठबंधन की बात होती है, तब-तब लखनऊ के गेस्ट हाउस कांड का जिक्र आता है। आखिर क्या है 1995 का लखनऊ गेस्ट हाउस कांड?

1993 में सपा और बसपा आएं थे साथ

बाबरी विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार बर्खास्त कर दी गई थी। जनता दल से नाता तोड़कर समाजवादी पार्टी बनाने वाले मुलायम सिंह यादव और बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए गठबंधन किया।

1993 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को 110 सीटें और बीएसपी को 67 सीटें मिली थीं। एसपी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बीएसपी और अन्य कुछ दलों के सहयोग से सरकार बनाई। बीएसपी मुलायम सरकार में शामिल नहीं हुई थी और सिर्फ बाहर से समर्थन दे रही थी।

जब दोनों के बीच आ गई थी दरार

हालांकि, इस दोस्ती में जल्द ही खटास आने लगी और दो साल के भीतर ही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रिश्ते इतने तल्ख हो गए कि गठबंधन टूटने की नौबत आ गई। समाजवादी पार्टी को भनक लग गई थी कि बीएसपी ने मुलायम सरकार से समर्थन वापस लेने का मन बना चुकी है और अंदरखाने बीजेपी के साथ सरकार बनाने की तैयारी चल रही है।

2 जून 1995 का वह दिन

बीएसपी प्रमुख कांशीराम के कहने पर पार्टी की प्रमुख नेता मायावती ने पार्टी के विधायकों की बैठक बुलाई। लखनऊ के गेस्ट हाउस में मायावती अपने विधायकों के साथ गठबंधन तोड़ने पर चर्चा कर रही थी। शाम का समय था, करीब 200 की संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और विधायकों ने गेस्ट हाउस पर हमला बोल दिया। एसपी कार्यकर्ताओं ने बीएसपी के विधायकों के साथ मारपीट शुरू कर दी। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के कहने पर मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर दिया। कुछ देर में भीड़ मायावती के कमरे तक पहुंच गई और दरवाजा तोड़ने की कोशिश करने लगी।

इस दौरान एसपी कार्यकर्ताओं ने मायावती को गालियां दीं और जातिसूचक शब्द भी बोले। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस दौरान मायावती के साथ बदसलूकी का भी प्रयास किया। इसके कुछ देर बाद एसपी और डीएम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मायावती की जान बचाई। मायावती को बचाने वाले अधिकारियों विजय भूषण सुभाष सिंह बघेल और तत्कालीन एसपी राजीव रंजन का जिक्र किया जाता है। दावा किया जाता है कि बीजेपी के ब्रह्मदत्त द्विवेदी और लालजी टंडन ने भी मायावती को बचाने में भूमिका निभाई थी। गेस्ट हाउस कांड के समय लखनऊ के तत्काली एसपी और वर्तमान डीजीपी ओपी सिंह को कांड के दो दिन बाद ही उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

बीजेपी ने किया माया का समर्थन

बीएसपी ने एसपी से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया और मुलायम सरकार बर्खास्त हो गई। इसके बाद बीजेपी ने मायावती को समर्थन का ऐलान किया और गेस्ट हाउस कांड के अगले ही दिन (3 जून 1995) मायावती ने यूपी के सीएम पद की शपथ ली।

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