यूपी की जेल में फिर क्यों ना हो हत्या और बवाल

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यूपी की जेलों में कभी हत्या तो कभी बवाल हो रहा है. अपराधियों को अपराध से दूर करने के उद्देश्य से बनायी गयी जेलों में ही अपराध का बोलबाला है. चित्रकूट जेल में दो कैदियों की और एक का पुलिस एनकाउंटर में मारा जाना और जौनपुर जेल में बवाल इसके ताजा उदाहरण हैं. ऐसा हो भी क्यों नहीं लगभग सभी जेलों में क्षमता से कहीं ज्यादा कैदी हैं. व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाकर्मी नाम मात्र के हैं. शोषण और अराजकता चरम पर है. यूपी की विभिन्न श्रेणी की 72 जेलों में 60 हजार 685 बंदियों को निरुद्ध करने की क्षमता है, जबकि 1, 02, 809 बंदी जेलों में बंद किए गए हैं. इनमें से 454 विदेशी भी हैं.

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ठूंस-ठूंस के भरे गए हैं कैदी

यूपी की कई जेलों में क्षमता से कई गुना ज्यादा कैदी भरे गए हैं. इनमें से कुछ को ही सजा मिली है अन्य विचाराधीन हैं. कैदियों की क्षमता अधिक होने की वजह से उन्हें पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाती है. चिकित्सा का भी इंतजाम सही तरीके से नहीं हो पाता है. इसके चलते कैदी आक्रोशित होते हैं कई बार बवाल भी करते हैं. जेलों में कैदियों की ज्यादा संख्या पर सुप्रीम कोर्ट भी टिप्पणी कर चुका है. कोरोना काल में तो उसने सात साल से कम सजा पाए कैदियों को पेरोल पर रिहा करने के लिए भी कहा था. कोरोना संक्रमण की पहली वेब में 2200 कैदियों को 60 दिन के पैरोल पर रिहा किया गया था. मई माह में अंतरिम जमानत पर 4803 कैदी रिहा किए गए. जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के होने का नुकसान यह हुआ कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में 1869 कैदी संक्रमित हुए. जेलकर्मी भी नहीं बच सके. सात बंदियों और चार जेल कर्मियों की मौत हुई.

सुरक्षा का नहीं पर्याप्त इंतजाम

यूपी की जेलों में क्षमता से लगभग दोगुने कैदी हैं. वहीं सुरक्षाकर्मी के जितने पद स्वीकृत हैं उसके आधे की ही तैनाती है. यूपी की जेलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाकर्मियों समेत अन्य 11098 पद स्वीकृत हैं. इनमें से आधा से भी कम 5223 ही जेल कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं. 5875 पद अभी भी खाली पड़े हैं. जेल वार्डर के 7329 पदों में से 2652 भी भरे गए हैं. जेल अधीक्षक 70 होने चाहिए लेकिन 48 ही हैं. जेलर 94 होने चाहिए लेकिन 90 हैं वहीं डिप्टी जेलर 474 के सापेक्ष 206 हैं.

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महिलाओं की हालत बदतर

यूपी की जेलों में महिलाओं कैदियों की हालत बदतर है. इसे खुद सरकारी आंकड़े बयां कर रहे हैं. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2018 से 2020 के बीच 54 से अधिक महिला कैदी मानसिक रोग से ग्रस्त हुईं. अवसाद में तीन महिलाओं ने आत्महत्या कर लिया. इसी वक्त में 280 से अधिक महिला कैदियों से पुलिस कस्टडी में दुष्कर्म के मामले सामने आए.
यूपी की कुछ प्रमुख जेलों की हालत

जेल- क्षमता- कैदी- दोषसिद्ध- विचाराधीन

मुरादाबाद- 717- 3387- 488- 2899
जौनपुर-320-1100-88-1012
देवरिया-533-1639-133-1506
मथुरा-554-1641-184-1457
सहारनपुर-533-1564-334-1234
गाजियाबाद-1704-4978-620-4358
वाराणसी-747-2164-174-1990
इटावा-610-1743-390-1353

यूपी की जेल की चर्चित हत्याएं

14 मई 2021 को चित्रकूट जेल में मुख्तार अंसारी गिरोह के मेराजुद्दीन उर्फ भाई मेराज और कुख्यात मुकाम काला को जेल में में बंद बदमाश अंशु दीक्षित ने गोली मारकर हत्या कर दी पुलिस ने उसे एनकांउटर में मार गिराया.
-9 जुलाई 2018 में यूपी की ही बागपत जेल में गैंगस्टर प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजंरगी को गोलियों से भून दिया गया था.
– मुन्ना बजरंगी को दस गोलियां मारी गयी थीं. इस मामले में पुलिस ने 22 जिंदा कारतूस बरामद किए थे.
-मुन्ना बजरंगी को साथी कैदी सुनील राठी ने गोली मारी थी.
-3 मई 2020 को बागपत जेल में ही ऋषिपाल नामक युवक की राड से पीटकर हत्या कर दी गयी थी. इसके साथ ही तीन लोग बुरी तरह से घायल हुए थे.
-13 मई 2004 बनारस जिला जेल में बंद पानदरीब के पार्षद रहे बंशी यादव को जेल के गेट पर बुलाकर गोलियों से छलनी कर दिया गया था.
-मुन्ना बजरंगी के शूटर अन्नू त्रिपाठी और बाबू यादव ने इस घटना को अंजाम दिया था.
-2 मार्च 2005 को बनारस सेंट्रल जेल में बंद कुख्यात अन्नू त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी.
-उसे जेल में ही बंद बदमाश संतोष गुप्ता उर्फ किट्टू ने गोली मारी थी.
-उरई जेल में बंदी अक्षय कुमार की 9 जनवरी 2001 को संदिग्ध मौत हो गयी थी. परिजनों शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान और गले पर कसे होने का निशान देखकर हत्या का आरोप लगाया था.

यूपी की जेल में कई बार हुआ बवाल

-5 मई 2021 को अम्बेडकर नगर जिला जेल में कैदियों ने हंगामा किया
-21 अप्रैल 2020 बलिया जेल में कैदियों ने जमकर बवाल काटा डाक्टर और डिप्टी जेलर पर हमला करके घायल कर दिया
-11 अक्टूबर 2019 में गोरखपुर जिला जेल में जेलर और सिपाही को पीटा और घंटो जेल पर कब्जा किये रहे.
-9 फरवरी 2019 को फैजाबाद जेल में कैदियों ने सिपाहियों और बंदी रक्षकों को 6 घंटे तक बंधक बनाए रखा.
26 मार्च 2017 फतेहगढ़ जिला जेल में कैदियों ने हंगामा किया था.
-27 मार्च 2017 फरुखाबाद जेल में हुए बवाल में जेलर घायल हो गया था.
3 अप्रैल 2016 बनारस जिला जेल में कैदियों ने जमकर हंगामा किया, घंटों जेल उनके कब्जे में रहा.

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