भौमवती अमावस्या है आज, जानिए महत्व और लाभ

भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह के तिथि-पर्व की विशेष महिमा है

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भौमवती अमावस्या : 24 मार्च को श्राद्ध की अमावस्या : 24 मार्च, मंगलवार को 108 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा एवं पूजा से मिलेगी खुशहाली, कटेंगे कष्ट भगवान शिवजी, श्रीविष्णु जी तथा पीपल वृक्ष की पूजा से होगी मनोकामना पूरी.

विमल जैन ज्योतिर्विद्

 

भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह के तिथि-पर्व की विशेष महिमा है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या तिथि भौमवती अमावस्या (bhaumvati amavasya) के नाम से जानी जाती है।

मंगलवार का दिन क्रूरवार (पापवार) होने से जनता जनार्दन को कुछ कष्टकारक बतलाई गई है। इस बार 24 मार्च, मंगलवार को अमावस्या तिथि पड़ने से भौमवती अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि सोमवार, 23 मार्च को दिन में 12 बजकर 31 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन मंगलवार, 24 मार्च को दिन में 2 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इस तिथि पर स्नान-दान-व्रत एवं श्राद्ध करने का विशेष महत्व है।

bhaumvati amavasya : ऐसे करें पूजा-अर्चना–

भौमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना से सुख-समृद्धि, खुशहाली मिलती है। श्राद्ध की अमावस्या मंगलवार, 24 मार्च को है। अमावस्या तिथि पर विधि-विधान पूर्वक पितरों की भी पूजा-अर्चना की जाती है। पितरों के आशीर्वाद से जीवन में भौतिक सुख-समृद्धि, खुशहाली का आगमन होता है। इस दिन पीपल के वृक्ष व भगवान् विष्णु जी की पूजा-अर्चना के साथ पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

पीपल वृक्ष की विशेष महिमा-

पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास माना गया है। पीपल के वृक्ष को जल से सिंचन करके विधि-विधान पूर्वक पूजा के पश्चात् 108 बार परिक्रमा करने पर सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत उपवास रखकर इष्टदेवी देवता एवं आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना अवश्य करनी चाहिए।

ब्राह्मण को घर पर निमन्त्रित करके उन्हें भोजन करवाकर सफेद रंग की वस्तुओं का दान जैसे-चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान्न, सफेद वस्त्र, चाँदी एवं अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के साथ देकर, उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए। किसी कारणवश यदि ब्राह्मण को भोजन न करवा सकें तो इस स्थिति में उन्हें भोजन सामग्री (सिद्धा) के साथ नकद द्रव्य देकर पुण्यलाभ प्राप्त करना चाहिए।

समस्त धार्मिक अनुष्ठान करने पर उत्तम फल की प्राप्ति होती है। पीपल के वृक्ष की पूजा का आज विशेष महत्व है।पीपल वृक्ष पूजा के मन्त्र- ॐ मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्ये विष्णुरूपिणे अग्रतो शिवरूपाय पीपलाय नमो नमः। आज के दिन व्रतकर्ता को अपनी दिनचर्या नियमित व संयमित रखते हुए यथासम्भव गरीबों, असहायों और जरूरतमन्दों की सेवा व सहायता तथा परोपकार अवश्य करना चाहिए। जिससे जीवन में सुख-शान्ति व खुशहाली बनी रहे।

विमल जैन वाराणसी के प्रख्यात हस्तरेखा विशेषज्ञ, रत्न परामर्शदाता, फलित अंक ज्योतिष एवं वास्तु विद हैं।

 

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