इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएए विरोधी प्रदर्शनकारी के खिलाफ जारी वसूली नोटिस पर लगाई रोक

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इलाहाबाद में 19 दिसंबर से शुरू हुए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के विरोध में सार्वजनिक सम्पत्ति नष्ट किए जाने के आरोप में कानपुर के निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ जारी वसूली नोटिस पर इलाहाबाद हाइकोर्ट ने रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस तरह के आदेशों की जांच कर रही है

एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि याचिकाकर्ता मोहम्मद फैजान को अंतरिम राहत में, न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति सौरभ श्याम की पीठ ने गुरुवार को अतिरिक्त जिलाधिकारी (एडीएम) द्वारा जारी नोटिस पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस तरह के आदेशों की जांच कर रही है।

वसूली नोटिस को चुनौती दी थी

फैजान के वकील ने वसूली नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि वसूली नोटिस एक एडीएम द्वारा जारी किया गया था जबकि सर्वोच्च न्यायालय की ओर से यह कहा गया है कि इस तरह का आदेश केवल सेवारत या सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या दावा आयुक्त के रूप में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश द्वारा दिया जा सकता है।

राज्य भर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ वसूली नोटिस जारी हुई है

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य भर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जारी वसूली नोटिस अधिकतर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी किए गए हैं।

यह सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के परिणाम के अधीन होगा

पीठ ने राज्य सरकार को एक महीने के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए उपयुक्त पीठ के समक्ष 20 अप्रैल, 2020 से शुरू हो रहे सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। यह सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के परिणाम के अधीन होगा।

एएमयू में भड़काऊ भाषण देने वाले डॉ कफील पर लगा रासुका

सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में भड़काऊ भाषण देने के आरोपी डॉ कफील खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वह इस मामले में आज ही मथुरा जेल से जमानत पर रिहा होने वाले थे लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई कर दी है। देशभर में सीएए के विरोध में एनएसए तामील किए जाने की यह पहली कार्यवाही है।

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